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दिल्ली ब्लास्ट: कैसे संभावित आत्मघाती हमलावर साजिश से पीछे हटा

दिल्ली ब्लास्ट का मास्टरमाइंड डॉ. उमर-उन-नबी एक दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था

Narendra Kumar Singh

नई दिल्ली/श्रीनगरः लाल किले के पास हाल में हुए कार बम धमाके के बाद पकड़े गए “सफेदपोश” आतंकी मॉड्यूल की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का मास्टरमाइंड डॉ. उमर-उन-नबी एक दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने सेब की पैदावार के मौसम में अपने परिवार की मदद करने की जरूरत का हवाला देते हुए इस आतंकी साजिश से पीछे हटने का फैसला कर लिया।

श्रीनगर पुलिस और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने नबी द्वारा संचालित एक समानांतर आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। नबी वही व्यक्ति था जो 10 नवंबर को ऐतिहासिक लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी गाड़ी चला रहा था। इस विस्फोट में 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के दौरान डॉक्टर से आतंकी बने व्यक्ति द्वारा अपनाई गई भर्ती की रणनीतियों का खुलासा हुआ है। इन्हीं जानकारियों के आधार पर एनआईए ने शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया।

सेब की पैदावर का मौसम बताकर बचा

अधिकारियों ने बताया कि नबी ने डार को एक संभावित आत्मघाती हमलावर के रूप में सफलतापूर्वक कट्टरपंथी बना दिया था, लेकिन पिछले साल अगस्त में हुई एक मुलाकात के दौरान उसने आखिरी समय में इस साजिश से पीछे हटने का फैसला किया। उसने इसके लिए “सेब की पैदावार का मौसम” और घर में मरम्मत का काम होने को कारण बताया। अधिकारियों के अनुसार, डार 2023 से नबी के संपर्क में था। उसने यह भी स्वीकार किया कि नबी का एक पेशेवर डॉक्टर होना उसके प्रभाव में आने का एक बड़ा कारण बना। डॉक्टर होने के कारण उसकी कट्टरपंथी बातें भर्ती किए गए लोगों को अधिक प्रभावशाली और “विश्वसनीय” लगती थीं।

जिहाद के लिए 'बायत'

अधिकारियों ने बताया कि जांच से संकेत मिला है कि नबी केवल आतंकी ही नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से भर्ती भी करता था। वह ‘प्राइमरी सेल’ के पकड़े जाने पर भी आतंकी अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सेकेंडरी, स्वतंत्र सेल बना रहा था। जांच के दौरान, पुलिस ने एक आरोपी के फोन से एक ‘वॉइस नोट’ भी बरामद किया, जिसमें वह जिहाद के लिए 'बायत' (निष्ठा की कसम) ले रहा है। बीच में ही स्कूल की पढ़ाई छोड़ चुका डार का नाम पहले भी जांच में सामने आया था, जब उसका एक दोस्त आतंकी संगठनों से जुड़ा था।

हमले के लिए आत्मघाती हमलावर होने जरूरी बताया

अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि वह सोशल मीडिया ‘टेलीग्राम’ के ज़रिए नबी के संपर्क में था और उसे हमेशा बेहतरीन शारीरिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता था। अधिकारियों के अनुसार, डार दूसरा संभावित आत्मघाती हमलावर था, जिसे नबी इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने बताया कि नबी कट्टरपंथी था और उसका मानना था कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आत्मघाती हमलावर का होना बेहद जरूरी है।

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