देश की दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां Bharat Heavy Electricals Limited और Steel Authority of India Limited इस समय गंभीर चुनौती का सामना कर रही हैं। केंद्र सरकार ने दोनों कंपनियों के खराब वित्तीय प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें ‘महारत्न’ दर्जा बनाए रखने के लिए एक साल का नोटिस जारी किया है। यदि प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो दोनों कंपनियों का यह प्रतिष्ठित दर्जा छिन सकता है।
कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि दोनों कंपनियां महारत्न दर्जे के लिए जरूरी वित्तीय मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रही हैं। नियमों के अनुसार किसी भी महारत्न कंपनी का पिछले तीन वर्षों का औसत शुद्ध लाभ (PAT) 5000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए, लेकिन BHEL और SAIL इस मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
भारत में महारत्न दर्जा पाने वाली कंपनियों को व्यापक वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता मिलती है। फिलहाल इस श्रेणी की कंपनियां बिना सरकार की मंजूरी के 5000 करोड़ रुपये तक के निवेश निर्णय ले सकती हैं।
लेकिन यदि किसी कंपनी को डाउनग्रेड कर ‘नवरत्न’ श्रेणी में डाल दिया जाता है, तो यह सीमा घटकर केवल 1000 करोड़ रुपये रह जाती है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स और विस्तार योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर एक साल के भीतर वित्तीय प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो दोनों कंपनियों को महारत्न से हटाकर नवरत्न श्रेणी में डाला जा सकता है। यह फैसला इन कंपनियों की रणनीतिक और निवेश क्षमता पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
यह पहली बार है जब किसी महारत्न पीएसयू को इस तरह की सख्त चेतावनी दी गई है। भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वे दोनों कंपनियों के लिए एक विस्तृत सुधार योजना तैयार करें।
इसके साथ ही सरकार ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों को भी सख्त कर दिया है। अब CSR खर्च, MSME वेंडर्स को समय पर भुगतान और अन्य वित्तीय अनुशासन जैसे मानकों पर भी कंपनियों की परफॉर्मेंस का आकलन किया जाएगा।
यदि BHEL और SAIL का ‘महारत्न’ दर्जा वापस लिया जाता है, तो न केवल उनकी निवेश क्षमता सीमित हो जाएगी, बल्कि बड़े औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है। इससे दोनों कंपनियों की बाजार प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ने की संभावना है।
सरकार का यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब अगले एक साल में BHEL और SAIL के सामने खुद को साबित करने की चुनौती होगी, वरना देश की दो बड़ी औद्योगिक ध्वजवाहक कंपनियां अपने सबसे बड़े सम्मान से हाथ धो सकती हैं।