कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ( फाइल फोटो ) 
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भूपेन बोरा ने गौरव गोगोई को नहीं, किसे बताया असम कांग्रेस का कर्ताधर्ता

कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने बुधवार को दावा किया कि विपक्षी पार्टी की प्रदेश इकाई अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है।

गुवाहाटीः कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने बुधवार को दावा किया कि विपक्षी पार्टी की प्रदेश इकाई अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है और धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन इसके “मुख्य कर्ताधर्ता” हैं।

भूपेन बोरा ने पीटीआई के साथ साक्षात्कार में दावा किया कि असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई अब केवल "पार्टी का चेहरा" हैं। उन्होंने दावा किया, "धुबरी सीट पर 10 लाख से अधिक वोट से जीत हासिल करने वाले रकीबुल हुसैन ही पार्टी के मुख्य कर्ताधर्ता हैं।"

बोरा ने कहा कि सोमवार को उनके द्वारा कांग्रेस आलाकमान को अपना त्यागपत्र भेजने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया और ‘‘2007 से हमारे संबंधों के बारे में विस्तार से बात की।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘उन्होंने (राहुल गांधी ने) इसका उल्लेख किया कि कैसे हमने मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाया जो सच है, लेकिन उन्होंने मेरे त्यागपत्र के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा।’’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार शाम को बोरा के आवास पर उनसे मुलाकात के बाद घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे। सोलह विपक्षी दलों के मोर्चा 'असम सन्मिलिता मंच' के अध्यक्ष रहे बोरा ने कहा कि 2024 में पांच विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले यह तय किया गया था कि बेहाली सीट से भाकपा (माले) का एक उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा, क्योंकि पिछले चुनाव में पार्टी को 40,000 वोट मिले थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी, लेकिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने मेरे प्रस्ताव पर विचार नहीं किया और प्रदेश इकाई के दो-तीन नेताओं ने अन्य नामों पर भी चर्चा शुरू कर दी। अंततः, एक ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया जो तब तक पार्टी का सदस्य भी नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेताओं ने मुझसे कहा था कि अगर आप पांच सीट में से एक भी सीट नहीं छोड़ सकते, तो अगले चुनाव में 126 सीट के बारे में चर्चा करने के लिए क्या बचता है। तब मैंने नैतिक आधार पर गठबंधन के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव में बुरी तरह हार गए।"

बोरा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह मुद्दा उठाया था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि साथ ही उन्हें व्यक्तिगत अपमान का भी सामना करना पड़ा, "अब इस बारे में बात करने का समय नहीं है।"

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