अंजलि भाटिया
नई दिल्लीः काफी लंबे समय के इंतजार और खींचतान के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल करने की अनुमति दे दी है। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद 26 जनवरी को पश्चिम बंगाल की झांकी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 17 अन्य राज्यों की झांकियों के साथ प्रदर्शित होगी।
इस वर्ष बंगाल की झांकी की थीम ‘भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल’ रखी गई है, जिसे राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती से जोड़कर तैयार किया गया है। दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
सूत्रों के अनुसार, बंगाल की झांकी को लेकर राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय के अधीन विशेषज्ञ समिति के बीच लंबे समय तक मतभेद बने रहे। बताया गया है कि झांकी के डिजाइन और विषय को लेकर दोनों पक्षों के बीच कम से कम पांच बैठकें हुईं। समिति की आपत्तियों के कारण कुछ समय तक यह आशंका बनी रही कि बंगाल की झांकी इस वर्ष परेड से बाहर हो सकती है हालांकि, रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय के अधिकारियों ने लगातार पक्ष रखा और राज्य सरकार की दलीलों को मजबूती से प्रस्तुत किया।
ममता बनर्जी के निर्देश के अनुसार झांकी
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बैठक के दौरान राज्य सरकार ने यह सवाल उठाया कि जब असम, ओडिशा, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की झांकियों की थीम का स्वतंत्रता संग्राम या वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ से सीधा संबंध नहीं है, तो केवल बंगाल की झांकी पर ही आपत्ति क्यों जताई जा रही है। राज्य सरकार की इस दलील के बाद विशेषज्ञ समिति को अपने रुख पर पुनर्विचार करना पड़ा और अंततः बंगाल की झांकी को मंजूरी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, झांकी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देशों के तहत तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश को यह दिखाना है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। झांकी में बंगाल के लेखकों, कवियों, बुद्धिजीवियों और क्रांतिकारियों के योगदान को प्रमुखता से दर्शाया जाएगा, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘वंदे मातरम्’ और स्वतंत्रता संग्राम का जुड़ाव
केंद्र की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि झांकी की थीम सीधे वंदे मातरम् पर आधारित हो। इस पर राज्य सरकार ने तर्क दिया कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और वंदे मातरम् एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते। राज्य का कहना था कि जैसे बंगाल के बिना स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अधूरा है, वैसे ही वंदे मातरम् के बिना वह आंदोलन कल्पना से बाहर है।
बंकिम चंद्र से नेताजी तक दिखेगा बंगाल का योगदान
झांकी में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और वंदे मातरम् को केंद्र में रखा गया है। इसमें यह भी दिखाया जाएगा कि किस तरह यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा बना और कैसे क्रांतिकारी इसे गाते हुए फांसी के फंदे तक पहुंचे। इसके अलावा झांकी में रवींद्रनाथ ठाकुर, काजी नजरुल इस्लाम, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अग्नियुग के क्रांतिकारी बिनॉय-बादल-दिनेश की झलक भी देखने को मिलेगी।
गौरतलब है कि बीते वर्षों में बंगाल की झांकी को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कई बार विवाद हो चुका है, खासकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर आधारित झांकी को रद्द किए जाने के बाद। ऐसे में इस वर्ष झांकी को मिली मंजूरी को राजनीतिक हलकों में पश्चिम बंगाल के लिए एक नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।