नई दिल्लीः सरकार ने शनिवार को नागरिकों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जुड़े व्यवधानों के बावजूद ईंधन की आपूर्ति पर्याप्त है और स्थिति नियंत्रण में है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और ऊर्जा की बचत करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने घरेलू एलपीजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को प्राथमिकता दी है, खासकर घरों, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं के लिए। मांग को संतुलित करने और आपूर्ति बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाया गया है और गैस सिलेंडर भरवाने के बीच का अंतराल भी बढ़ाया गया है।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सख्ती बढ़ाई गई है। अब तक 3,700 से अधिक छापेमारी की गई है, एलपीजी वितरकों को लगभग 1,000 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से अब तक 27 डीलरों को निलंबित किया जा चुका है। वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक सीमित किया गया है, जबकि केरोसिन (मिट्टी का तेल) और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि दबाव कम किया जा सके।
पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त भंडार उपलब्ध
प्राकृतिक गैस के मामले में घरों और परिवहन क्षेत्र को पूरी आपूर्ति दी जा रही है, जबकि उद्योग और उर्वरक क्षेत्रों के लिए आपूर्ति धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और देशभर के पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बढ़ती वैश्विक कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है और निर्यात पर शुल्क लगाया है। इसी बीच लगभग आधे दिन की खाना पकाने की गैस की आपूर्ति ले जा रहा एक भारतीय एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर चुका है, जबकि ईरान का एक अन्य जहाज मंगलौर बंदरगाह पर पहुंच गया है।
ग्रीन सानवी नामक जहाज ने होर्मुज पार किया
सरकार ने शनिवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर जानकारी देते हुए कहा कि ‘ग्रीन सानवी’ नामक एलपीजी जहाज 46,650 टन रसोई गैस और 25 नाविकों के साथ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। ग्रीन सानवी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवां भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर है। यह जलडमरूमध्य 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद से लगभग बंद जैसी स्थिति में है, जिससे जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। अलग से, बयान में कहा गया कि ईरान से रसोई गैस लेकर आया एक जहाज मंगलौर बंदरगाह पहुंच चुका है और उससे गैस उतारी जा रही है। संभवतः पिछले सात वर्षों में यह ईरान से ऊर्जा की पहली खरीद है।
‘सी बर्ड’ पहले ही आ चुका है
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि ‘सी बर्ड’ नामक एलपीजी जहाज, जो लगभग 44,000 टन ईरानी रसोई गैस लेकर आया है, दो अप्रैल को मंगलौरु बंदरगाह पर पहुंचा और फिलहाल उससे गैस उतारी जा रही है। यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने हाल ही में ईरान के तेल और उससे जुड़े उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है, ताकि पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। ‘ग्रीन सानवी’ के गुजरने के बाद भी 17 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं।