जयपुर : राजस्थान के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि वे उन्हें (डोटासरा को) अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझते हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर अपने इस बयान में उन्होंने कांग्रेस पार्टी में बने या नहीं बने रहने के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं लिखा है। उनका ताजा बयान हालिया नगर निकाय चुनावों को लेकर डोटासरा पर निशाना साधे जाने के दो दिन बाद आया है। कांग्रेस के नेता से इस बारे में बात नहीं हो सकी।
सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में डोटासरा को संबोधित करते हुए लिखा, आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जीवन मे हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुन कर ही फैसला लिया है आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं उस से मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है, मेरा भी अन्तर मन दुखी और व्यथित है।
उन्होंने कहा, ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं, मैं शायद अब आपकी गलत रीति नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा। इस बयान में पार्टी में बने रहने को लेकर उनका रुख स्पष्ट नहीं है। उल्लेखनीय है कि सिंह ने पहले नगर निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के लिए कांग्रेस के भरतपुर और डीग जिला अध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि टिकट अपने चहेतों को बांटे गए जबकि असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीधे डोटासरा पर निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग की। साथ ही उन्होंने भर्ती परीक्षाओं और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के परिवार के सदस्यों को कथित तौर पर मिले लाभों से जुड़े आरोपों की जांच की भी मांग की।
वहीं डोटासरा ने गुरुवार को कांग्रेस में मतभेद की बातों को खारिज कर दिया और ऐसी खबरों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के टूलकिट का हिस्सा बताया। डोटासरा ने कहा था, हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। यह भाजपा का टूलकिट है।
भाजपा दुष्प्रचार करती है और यह दिखाने की कोशिश करती है कि कांग्रेस में मतभेद हैं। सिंह राजस्थान विधानसभा में डीग-कुम्हेर सीट से पूर्व विधायक हैं और पिछली अशोक गहलोत सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके हैं। वे 2023 का विधानसभा चुनाव हार गए थे।