रांची : झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकारी खजाने से कथित फर्जी वेतन निकासी की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की।
BJP के वरिष्ठ नेता मरांडी ने आरोप लगाया कि मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार' की ओर इशारा करता है।
मरांडी ने पत्र में उल्लेख किया, अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों में इस घोटाले की पुष्टि हुई है। इन जिलों से 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के संकेत मिले हैं।
मरांडी ने पुलिस अधीक्षकों (SP) एवं पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में JAP-IT की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
मरांडी ने मांग की, इस गंभीर राजकोषीय घोटाले की जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जानी चाहिए या झारखंड उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की देखरेख में न्यायिक जांच के माध्यम से की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई का पता चल सके और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके।
हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कोषागार घोटाले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और गबन की राशि 28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
बोकारो में जांच से पता चला है कि पुलिस विभाग के एक लेखाकार ने कथित तौर पर कोषागार के वेतन वितरण खाते से छह करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाली थी, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने शुक्रवार को सरकारी खजाने से कथित फर्जी वेतन निकासी के मामले में राज्यव्यापी जांच के आदेश दिए।