रांची : जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को दावा किया कि झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर सारंडा वन प्रभाग को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के उसके पूर्व के आदेश के कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण का अनुरोध किया है।
विधानसभा में अपने तारांकित प्रश्न के जवाब में राज्य वन विभाग द्वारा दिए गए लिखित उत्तर का हवाला देते हुए जनता दल (यूनाइटेड) विधायक राय ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देश को लागू करने से पहले समीक्षा का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर, 2025 को झारखंड सरकार को पारिस्थितिकीय रूप से महत्वपूर्ण सारंडा वन के 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का आदेश दिया था।
राज्य सरकार को अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए फैसले की तारीख से तीन महीने की समय सीमा दी गई थी। शीर्ष अदालत ने क्षेत्र के पारिस्थितिकीय महत्व को देखते हुए सारंडा के जंगलों को ‘दुनिया के सबसे प्राचीन साल वन क्षेत्रों में से एक’ बताया था।
राय ने कहा, झारखंड सरकार ने सारंडा वन प्रभाग को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया है, बल्कि इसके बजाय न्यायालय के पूर्व के आदेश के कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण का अनुरोध करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की है। यह जानकारी सरकार ने विधानसभा में मेरे तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की तीन महीने की समय सीमा 12 फरवरी को समाप्त हो गई। राज्य सरकार ने अपने लिखित जवाब में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि पुनर्विचार याचिका किस तारीख को दायर की गई थी या याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है या नहीं।