रांची : अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को यहां घोषणा की कि वह यहां अपना तीसरा एवं सबसे बड़ा परिसर स्थापित करेगा जो 150 एकड़ में फैला होगा।
अधिकारियों के अनुसार, नये रांची परिसर में शैक्षणिक गतिविधियां जुलाई से शुरू होंगी। शुरुआत में यहां दो स्नातकोत्तर कार्यक्रम और तीन डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के रांची परिसर के कुलपति (नामित) जुल्फिकार हैदर ने कहा, जुलाई से परिसर की शुरुआत दो स्नातकोत्तर (एमए) कार्यक्रम के साथ होगी, जिसमें प्रायोगिक अर्थशास्त्र में परास्नातक और विकास में परास्नातक शामिल है। इसके अलावा, स्थानीय विकास, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और शैक्षिक मूल्यांकन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास में कई अल्पकालिक प्रमाण पत्र कार्यक्रम भी कराए जाएंगे।
इस परिसर की स्थापना का उद्देश्य पूर्वी भारत में विश्वविद्यालय की उपस्थिति का और विस्तार करना है तथा संदर्भ आधारित समाजिक भागीदारी वाली उच्च शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूती देना है।
हैदर ने कहा, रांची परिसर इस क्षेत्र की सामाजिक और विकास आवश्यकताओं से निकटता से जुड़ा होगा और ज्ञान एवं मानव संसाधन निर्माण में योगदान देगा।
उन्होंने बताया कि यहां पहले शैक्षणिक वर्ष में लगभग 150 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद, इस परिसर में विभिन्न पाठ्यक्रमों के तहत सालाना करीब 6,500 छात्रों को समायोजित किया जाएगा।
जुल्फिकार हैदर ने बताया कि विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे, जो कामकाजी पेशेवरों सहित विविध छात्रों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य झारखंड के आदिवासी और अन्य समुदायों की समृद्ध परंपराओं, इतिहास और ज्ञान प्रणालियों के साथ सार्थक जुड़ाव बनाना है।
इसके साथ ही, इटकी में बना यह परिसर पूरी तरह आवासीय होगा। यहां छात्रों और शिक्षकों के रहने की सुविधा के साथ-साथ अत्याधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, और खेल-कूद की बेहतरीन सुविधाएं भी मिलेंगी।