महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है।  
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मातोश्री में मची बेचैनी! क्या उद्धव ठाकरे के सांसद भी बगावत की राह पर?

सांसदों की बैठकों से दूरी, अलग-अलग नेताओं से मुलाकातें और स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर असमंजस ने शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की चर्चाओं को हवा दी

Goutam Ojha

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। कभी एकनाथ शिंदे की बगावत से सत्ता गंवाने वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) अब एक नए संकट की आहट महसूस कर रही है। पार्टी के भीतर सांसदों की कथित नाराजगी और संभावित टूट की चर्चाओं ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल, मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों की अहम बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में सभी सांसदों की मौजूदगी नहीं रही। कुछ सांसदों के अनुपस्थित रहने और बाद में अलग-अलग राजनीतिक गतिविधियों में नजर आने से राजनीतिक गलियारों में नए कयास शुरू हो गए हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ सांसदों के भाजपा या शिंदे गुट के संपर्क में होने की अटकलें जोर पकड़ रही हैं।

उद्धव ठाकरे के लिए हो सकता है बड़ा झटका

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के मुखर नेता संजय राउत सार्वजनिक तौर पर सबकुछ सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनके हालिया बयान और सोशल मीडिया पोस्ट ने उल्टा सवाल खड़े कर दिए हैं। राउत ने दलबदल कानून और अन्य राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए जिस तरह की टिप्पणी की, उससे यह संदेश गया कि पार्टी नेतृत्व संभावित टूट की आशंका को लेकर पूरी तरह निश्चिंत नहीं है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सांसदों को लेकर उठ रही अटकलें सही साबित होती हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका होगा। पहले ही विधानसभा में बड़ी टूट का सामना कर चुकी पार्टी के लिए लोकसभा स्तर पर किसी भी प्रकार का असंतोष संगठनात्मक चुनौती बन सकता है।

पार्टी ने खबरों को बताया अफवाह

हालांकि पार्टी की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि सभी सांसद शिवसेना (यूबीटी) के साथ हैं और टूट की खबरें केवल अफवाह हैं। इसके बावजूद सांसदों की बैठकों से दूरी, अलग-अलग नेताओं से मुलाकातें और स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर कुछ नेताओं की अनिश्चितता ने चर्चाओं को और हवा दे दी है।

शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम पर नजर

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आगामी दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी, खासकर शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद। यदि सभी सांसद एक मंच पर दिखाई देते हैं तो अटकलों पर विराम लग सकता है, लेकिन अगर अनुपस्थिति का सिलसिला जारी रहा तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े सियासी घटनाक्रम से इनकार नहीं किया जा सकता।

आने वाले दिन होंगे निर्णायक

उधर महायुति खेमे ने इसे उद्धव गुट का आंतरिक मामला बताया है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व भाजपा पर लगातार विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगा रहा है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मातोश्री की यह बेचैनी महज अफवाहों का असर है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति किसी नए राजनीतिक 'ऑपरेशन' की ओर बढ़ रही है? आने वाले कुछ दिन इस सवाल का जवाब तय करेंगे।

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