कोलकाता : आत्मनिर्भरता की दिशा में अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने नौसेना भौतिक एवं समुद्रविज्ञान प्रयोगशाला (एनपीओएल) — जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक इकाई है — के लिए एक उन्नत ध्वनिक अनुसंधान पोत की कील रखी।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. समीर वी. कामत, सचिव, रक्षा (अनुसंधान एवं विकास) विभाग एवं अध्यक्ष, डीआरडीओ उपस्थित थे। इस अवसर पर कमोडोर पी आर हरी, आईएन (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीआरएसई; कमांडर शांतनु बोस, आईएन (सेवानिवृत्त), निदेशक (शिपबिल्डिंग), जीआरएसई; कैप्टन (आईएन) पी सुनील कुमार (सेवानिवृत्त), निदेशक (कॉर्पोरेट प्लानिंग एवं कार्मिक); निरंजन भालेराव, निदेशक (वित्त), जीआरएसई; डॉ. आर वी हारा प्रसाद, डी.एस. एवं डी.जी. (एनएस एंड एम), मुख्यालय डीआरडीओ; डॉ. डी. शेषागिरि, ओ.एस. एवं निदेशक (एनपीओएल) तथा जीआरएसई एवं एनपीओएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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उन्नत एआरएस के लिए अनुबंध अक्टूबर 2024 में जीआरएसई और एनपीओएल के बीच हस्ताक्षरित हुआ था। यह जहाज 93 मीटर लंबा और 18 मीटर चौड़ा होगा तथा अत्याधुनिक अनुसंधान उपकरणों से सुसज्जित एक उन्नत मंच होगा। यह पोत 4 नॉट से 12 नॉट की गति सीमा में संचालित हो सकेगा। अधिकतम गति पर, यह जहाज एक ही मिशन में 30 दिनों या 4,500 नौटिकल मील की दूरी तय करने में सक्षम होगा। इस पर कुल 120 कर्मियों का दल होगा। एआरएस की क्षमताओं में विभिन्न ध्वनिक मॉड्यूल जैसे उपकरणों की तैनाती, टोइंग एवं पुनर्प्राप्ति, ध्वनि वेग प्रोफाइल के उच्च-रिज़ॉल्यूशन सर्वेक्षण, महासागरीय ज्वार/धारा संबंधी आंकड़ों का संग्रहण शामिल होगा, जिनका उपयोग सर्वेक्षण अनुकूलन, अंडरवाटर मूरिंग्स तथा अपतटीय तैनाती के डिजाइन में किया जाएगा।
यह अनुसंधान पोत ध्वनि प्रसार अध्ययन में वायुमंडलीय मापदंडों के प्रभाव को समझने हेतु मौसम संबंधी सर्वेक्षण भी करेगा तथा कम गहराई वाले जल में ध्वनिक प्रतिध्वनि अध्ययन करने में सक्षम होगा। यह स्वतंत्र बुआय (buoy) लॉन्च करने, मूरिंग एवं उनके रखरखाव तथा डेटा संग्रहण करने में भी सक्षम होगा। इसकी विस्तृत गति सीमा इसे ध्वनिक प्रणाली परीक्षणों के दौरान विभिन्न गति स्तरों पर संचालन की सुविधा प्रदान करेगी, साथ ही यह संचालन के दौरान ध्वनि रहित वातावरण बनाए रख सकेगा। एआरएस में डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम भी होगा, जो इसे समुद्री अवस्था 4 (Sea State 4) तक अपनी स्थिति बनाए रखने में सक्षम बनाएगा। इस पोत में डीज़ल-इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली होगी और तीन डेक क्रेन अनुसंधान उपकरणों के संचालन के लिए लगाए जाएंगे।
जीआरएसई के पास अनुसंधान और सर्वेक्षण जहाजों के निर्माण का समृद्ध अनुभव है। इसने 1980 और 1990 के दशक में नौसेना के लिए पहली श्रृंखला की संधायक श्रेणी के सर्वे पोत बनाए थे। 1994 में, जीआरएसई ने एनपीओएल के लिए आईएनएस सागरध्वनि का निर्माण किया था — यह एक समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है, जो आज भी सेवा में है और हाल ही में इसके बड़े पुनर्निर्माण एवं उन्नयन के लिए जीआरएसई लौटा है। 2023 से अब तक, जीआरएसई ने नौसेना को आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशाक और आईएनएस ईक्षक — संधायक श्रेणी के दूसरे चरण के चार बड़े सर्वे पोतों में से तीन — सौंपे हैं।
16 जुलाई 2024 को, जीआरएसई ने राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के साथ एक उन्नत महासागर अनुसंधान पोत के निर्माण के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इसके अतिरिक्त, जीआरएसई भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के लिए दो तटीय अनुसंधान पोतों का निर्माण भी कर रहा है। जीआरएसई द्वारा छह से सात महीनों के भीतर एआरएस परियोजना में दूसरा मील का पत्थर हासिल करने पर बधाई देते हुए डॉ. कामत ने कहा, “एनपीओएल 1994 से जीआरएसई द्वारा निर्मित सागरध्वनि का संचालन कर रहा है और पिछले 31 वर्षों में इस जहाज ने उत्कृष्ट सेवा दी है। इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम इस नए जहाज को सागरध्वनि से कहीं अधिक उन्नत क्षमताओं के साथ बनाएं। मुझे विश्वास है कि जीआरएसई इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करेगा और निर्धारित समयसीमा के भीतर जहाज को सौंपेगा।”
इस अवसर पर कमोडोर पीआर हरी, आईएन (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीआरएसई ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की 94वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शिपयार्ड द्वारा विभिन्न प्रकार के आधुनिक जहाजों के निर्माण में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।