पिनराई विजयन को गले लगाने से इनकार की बात कहने पर विवाद, विपक्षी एकता पर उठे सवाल 
देश/विदेश

राहुल के एक बयान से INDIA में बढ़ी तकरार, गठबंधन के सहयोगी नहीं आ रहे रास

गहलोत की राहुल को स्वाभाविक नेता मानने की अपील के तुरंत बाद सहयोगी दलों से टकराव, भाजपा को विपक्षी मतभेदों पर हमला करने का मौका मिला

नई दिल्लीः भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कोशिशों के बीच INDIA गठबंधन में असहजता बढ़ती दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान ने सहयोगी दलों, खासकर वामपंथी खेमे में नाराजगी पैदा कर दी है। केरल के वरिष्ठ CPM नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गले लगाने से इनकार करने संबंधी राहुल गांधी की टिप्पणी अब विपक्षी राजनीति में नई बहस का विषय बन गई है।

दिलचस्प बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने सार्वजनिक रूप से सभी विपक्षी दलों से राहुल गांधी को विपक्ष का स्वाभाविक नेता मानने की अपील की थी। गहलोत का मानना था कि भाजपा के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए विपक्ष को एक चेहरे और साझा नेतृत्व की जरूरत है।

बैठक का बयान बना विवाद का कारण

8 जून को हुई INDIA गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि वह पिनराई विजयन को गले नहीं लगा सकते, क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई चल रही है। राहुल के इस बयान को लेकर वामपंथी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

केरल में कांग्रेस और CPM वर्षों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में दोनों दल INDIA गठबंधन के साझेदार हैं। ऐसे में सहयोगी दलों का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के बयान विपक्षी एकता के संदेश को कमजोर करते हैं।

CPM नेताओं ने उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने कहा कि मुद्दा गले मिलने का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संकेत का है जो इस बयान से जाता है। उनके अनुसार, विपक्षी गठबंधन के नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर इस तरह की दूरी दिखना सही संदेश नहीं देता।

CPM के वरिष्ठ नेताओं ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी एकता केवल मंच साझा करने तक सीमित नहीं हो सकती। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों के प्रति सम्मान और भरोसा भी जरूरी है।

गहलोत की अपील के बाद बढ़ी असहजता

राजनीतिक गलियारों में इस विवाद की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि हाल ही में अशोक गहलोत ने विपक्षी दलों से राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने की अपील की थी। ऐसे में सहयोगी दलों के साथ बढ़ता टकराव कांग्रेस की उस रणनीति को झटका माना जा रहा है, जिसमें राहुल गांधी को विपक्ष के केंद्रीय चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे INDIA गठबंधन के लिए ऐसे विवाद असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। खासकर तब, जब गठबंधन के प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक भरोसे को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हों।

भाजपा को मिला हमला करने का मौका

विवाद के बाद भाजपा ने भी INDIA गठबंधन पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि गठबंधन के भीतर वैचारिक और राजनीतिक मतभेद इतने गहरे हैं कि उसके नेता सार्वजनिक रूप से भी एक-दूसरे के साथ सहज नजर नहीं आते।

राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर साथ खड़े विपक्षी दल क्या राज्यों की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर एक साझा राजनीतिक संदेश देने में सफल हो पाएंगे या नहीं। फिलहाल, इस विवाद ने INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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