नई दिल्ली: भगवान शिव के परम धाम माने जाने वाले कैलाश मानसरोवर की कठिन और पवित्र यात्रा का आगाज हो गया है। नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में आयोजित कार्यक्रम में विदेश राज्यमंत्री Pabitra Margherita ने तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 औपचारिक रूप से शुरू हो गई।
उद्घाटन समारोह में विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गरीटा ने यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह यात्रा श्रद्धा, धैर्य और संकल्प की परीक्षा है। उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना की।
इस वर्ष यात्रा के लिए सिक्किम स्थित Nathu La मार्ग का चयन किया गया है। पहले जत्थे में 50 यात्री शामिल हैं। राजधानी दिल्ली से रवाना होने के बाद श्रद्धालु सिक्किम पहुंचेंगे, जहां से उनका कारवां आगे बढ़ेगा। नाथू ला मार्ग को अपेक्षाकृत सुगम और बेहतर सुविधाओं वाला रास्ता माना जाता है, जिससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यह यात्रा 21 दिन में पूरी होगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन मौसम को देखते हुए सभी यात्रियों की विस्तृत मेडिकल जांच की गई। इसके अलावा उन्हें उच्च हिमालयी परिस्थितियों में सुरक्षित रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
विदेश मंत्रालय की देखरेख में संचालित इस यात्रा के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सहायता, आपातकालीन सेवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक मजबूत की गई हैं। केंद्र और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी पूरे अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल धार्मिक श्रद्धा का विषय नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस यात्रा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन कड़े स्वास्थ्य मानकों और चयन प्रक्रिया के बाद ही सीमित संख्या में यात्रियों को अवसर मिल पाता है।