वैश्विक कूटनीति के केंद्र में एक बार फिर भारत की भूमिका मजबूत होती नजर आ रही है। अगले सप्ताह फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस बार भारत केवल एक आमंत्रित देश नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख साझेदार होगा। भारत को सम्मेलन के सभी प्रमुख ट्रैक्स में भाग लेने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जिसे उसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के रूप में देखा जा रहा है।
पश्चिम एशिया संकट पर होगी विशेष बैठक
जी7 सम्मेलन का सबसे अहम एजेंडा पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और उसके वैश्विक प्रभाव होंगे। फ्रांसीसी सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर एक विशेष उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष नेता शामिल होंगे।
बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते जोखिमों को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है।
समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा फोकस
फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा संकट का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता बन गया है।
भारत लंबे समय से मुक्त और सुरक्षित समुद्री व्यापार का समर्थक रहा है। ऊर्जा आयात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से भी यह मुद्दा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-फ्रांस रिश्तों में बढ़ा रणनीतिक भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से पहले फ्रांस की ओर से आए बयान दोनों देशों के संबंधों में बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। फ्रांसीसी सूत्रों ने भारत को अपनी "शीर्ष प्राथमिकताओं" में शामिल बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग ने भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई दी है। दोनों देश अब कई वैश्विक मुद्दों पर समान सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की सराहना
फ्रांस ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की खुलकर प्रशंसा की है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि भारत जिस तरह अपने विकास और चुनौतियों का समाधान खोज रहा है, वह कई देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
फ्रांस ने भारत की सफल जी20 अध्यक्षता का भी उल्लेख किया और कहा कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही ब्रिक्स मंच पर भारत के स्वतंत्र और संतुलित दृष्टिकोण की भी सराहना की गई।
रक्षा सहयोग में नया अध्याय
भारत और फ्रांस के संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग माना जाता है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब दोनों देशों के बीच संबंध पारंपरिक खरीदार और विक्रेता तक सीमित नहीं हैं।
उनका कहना है कि भविष्य के रक्षा समझौते साझेदारी और संयुक्त उत्पादन के मॉडल पर आधारित होंगे। ‘मेक इन इंडिया’ को इन समझौतों का अहम हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
भारत की कूटनीतिक ताकत का संकेत
जी7 सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी और पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उसे प्रमुख भूमिका मिलना इस बात का संकेत है कि वैश्विक शक्तियां अब भारत को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली निर्णयकर्ता के रूप में देख रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भारत की बढ़ती भूमिका आने वाले वर्षों में विश्व राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।