राज्य में अब 'देवभूमि परिवार अधिनियम-2026' लागू हो गया है, प्रत्येक पात्र परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी। 
देश/विदेश

देवभूमि में अब हर परिवार की होगी डिजिटल पहचान, फर्जी लाभार्थियों पर लगेगी लगाम

वरिष्ठ महिला बनेगी परिवार की मुखिया, विशेष प्राधिकरण और कड़े डेटा सुरक्षा कानून के साथ उत्तराखंड में डिजिटल सुशासन की नई शुरुआत

देहरादून: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब 'देवभूमि परिवार अधिनियम-2026' लागू हो गया है, जिसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी। इस पहल के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने परिवार आधारित डिजिटल पहचान की ऐसी व्यवस्था लागू की है।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी के बाद यह कानून 14 जून से प्रभावी हो गया। नई व्यवस्था के तहत राज्य में लंबे समय से निवास कर रहे परिवारों का एक केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने में आसानी होगी।

महिलाओं को मिलेगी प्राथमिक भूमिका

इस कानून की सबसे खास बात यह है कि परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे परिवार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी और भूमिका मजबूत होगी।

बनेगा विशेष प्राधिकरण

पूरे सिस्टम के संचालन और निगरानी के लिए देवभूमि परिवार प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि मुख्य सचिव उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साइबर सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल किए जाएंगे।

राज्य के प्रत्येक जिले में अपर जिला अधिकारी स्तर के अधिकारी को जिला देवभूमि परिवार अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो रिकॉर्ड के सत्यापन, अपडेट और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

योजनाओं का लाभ होगा अधिक पारदर्शी

सरकार का दावा है कि नई आईडी व्यवस्था लागू होने के बाद एक ही परिवार द्वारा अलग-अलग नामों से बार-बार योजनाओं का लाभ लेने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। साथ ही नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी कम होगी।

डेटा सुरक्षा पर सख्त कानून

नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून में कड़े दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। किसी भी व्यक्ति द्वारा डेटाबेस से छेड़छाड़, अनधिकृत पहुंच, वायरस डालने या डेटा नष्ट करने पर 10 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 50 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

वहीं गलत जानकारी देकर पहचान बदलने या फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने पर तीन वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकृत अधिकारी बताकर नागरिकों की जानकारी एकत्र करता है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल सुशासन की ओर बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि देवभूमि परिवार आईडी व्यवस्था भविष्य में सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने में मददगार साबित हो सकती है। उत्तराखंड सरकार इसे डिजिटल गवर्नेंस और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है।

SCROLL FOR NEXT