केदारनाथ और वैष्णो देवी जैसे पवित्र तीर्थों की यात्रा करने की चाह रखने वाले श्रद्धालुओं को एक संगठित साइबर गिरोह ने अपना शिकार बना लिया। फर्जी हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग वेबसाइटें बनाकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हैरानी की बात यह है कि गिरोह ने ऐसी वेबसाइटें तैयार की थीं, जो पहली नजर में सरकारी या अधिकृत पोर्टल जैसी दिखाई देती थीं। जांच में सामने आया है कि देशभर में दर्ज दर्जनों साइबर शिकायतों के पीछे इसी गिरोह का हाथ हो सकता है।
दक्षिण जिला साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ओमप्रकाश कुमार, रोहित कुमार और श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो आरोपी बिहार के नालंदा से पकड़े गए, जबकि कथित मास्टरमाइंड श्रेयांश तिवारी को ग्रेटर नोएडा से हिरासत में लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह धार्मिक यात्राओं के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग का झांसा देकर लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना रहा था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक श्रद्धालु ने हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर 20 हजार रुपये से अधिक की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि पीड़ित ने दो संदिग्ध वेबसाइटों के जरिए टिकट बुक करने की कोशिश की थी।
तकनीकी पड़ताल में सामने आया कि इन वेबसाइटों को बेहद पेशेवर तरीके से डिजाइन किया गया था ताकि वे असली बुकिंग पोर्टल जैसी दिखाई दें और लोग आसानी से धोखे में आ जाएं।
आरोपियों ने वेबसाइट का नाम, डिजाइन, रंग, बुकिंग फॉर्म और भुगतान प्रक्रिया तक इस तरह तैयार की थी कि आम व्यक्ति के लिए असली और नकली वेबसाइट में अंतर करना मुश्किल हो जाए।
जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह का तकनीकी संचालन श्रेयांश तिवारी संभाल रहा था, जो वेबसाइट डेवलपमेंट और ऑनलाइन नेटवर्क मैनेजमेंट में माहिर था।
गिरोह केवल वेबसाइट बनाकर नहीं रुका। आरोपियों ने फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापनों के जरिए इन साइटों का प्रचार भी किया। जब कोई व्यक्ति केदारनाथ या वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर सेवा से जुड़ी जानकारी खोजता था, तो उसे इन्हीं फर्जी वेबसाइटों के लिंक दिखाई देते थे।
यहीं से श्रद्धालु साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पहली रकम लेने के बाद आरोपी पीड़ितों से लगातार संपर्क बनाए रखते थे। कभी रजिस्ट्रेशन फीस, कभी बीमा शुल्क, कभी सत्यापन चार्ज और कभी रिफंड प्रोसेसिंग के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाते थे।
विश्वास जीतने के लिए पीड़ितों को ई-मेल और व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी ई-टिकट भी भेजे जाते थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपियों के डिजिटल नेटवर्क का संबंध देशभर में दर्ज करीब 30 साइबर शिकायतों से जुड़ा हुआ मिला है। शुरुआती जांच में लगभग 10 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, हालांकि वास्तविक रकम इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के तार दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, महाराष्ट्र समेत कम से कम 12 राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले हैं।
ठगी की रकम सीधे अपने खातों में लेने के बजाय आरोपी कई बैंक खातों और डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करते थे। इससे पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
फिलहाल पुलिस इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस ने शिकायतकर्ता से ठगे गए 20,328 रुपये भी संबंधित बैंक खाते में फ्रीज करा दिए हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क लंबे समय से धार्मिक यात्राओं की आड़ में देशभर के श्रद्धालुओं को निशाना बना रहा था। आने वाले दिनों में मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि धार्मिक यात्रा या हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग केवल अधिकृत वेबसाइटों के माध्यम से ही करें। वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से जांचें और किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करें।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने पर ठगी गई रकम को बचाने की संभावना बढ़ जाती है।