विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में चीन के अपने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से निवेश का परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 
देश/विदेश

चीन ने रूस को छोड़ा पीछे, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वायुसेना बना PLAAF

2,000 से अधिक लड़ाकू विमानों, स्टील्थ तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों के सहारे चीन ने वायु शक्ति में रूस को पछाड़ा, इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन बदला

बीजिंग: वैश्विक सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चीन की वायुसेना (PLAAF) ने विमान संख्या और आधुनिक लड़ाकू क्षमताओं के मामले में रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वायुसेना का दर्जा हासिल कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में चीन ने अपने रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में जिस तेजी से निवेश किया है, उसका परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

2,000 से अधिक लड़ाकू विमानों के साथ चीन की बढ़ी ताकत

ओपन-सोर्स सैन्य आंकड़ों के अनुसार, चीनी वायुसेना के पास 110 से 130 फाइटर फॉर्मेशन हैं, जिनमें करीब 2,000 से 2,500 लड़ाकू विमान शामिल हैं। कुल सैन्य विमानों की संख्या लगभग 3,733 बताई जाती है। इनमें 2,184 से अधिक ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जो सीधे युद्ध अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

चीन ने केवल विमानों की संख्या बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि स्टील्थ तकनीक, इंटीग्रेटेड सेंसर नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को भी तेजी से विकसित किया है।

एक दशक की रणनीति ने बदली तस्वीर

चीन की यह उपलब्धि किसी एक परियोजना का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही सैन्य आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। बीजिंग ने घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने, स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने और नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास पर भारी निवेश किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संभावित बड़े सैन्य संघर्षों को ध्यान में रखते हुए चीन ने अपनी वायु शक्ति को नए स्तर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई है।

रूस क्यों हुआ पीछे?

रूस लंबे समय तक अमेरिका के बाद दुनिया की सबसे प्रभावशाली वायु शक्तियों में गिना जाता था। हालांकि, यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंधों, उत्पादन संबंधी चुनौतियों और लगातार बढ़ती सैन्य जरूरतों ने उसकी वायुसेना पर दबाव बढ़ाया है।

रक्षा आंकड़ों के मुताबिक, रूस की एयरोस्पेस फोर्सेज के पास वर्तमान में लगभग 1,300 से 1,500 लड़ाकू विमान हैं। इसके मुकाबले चीन अब संख्या और कई आधुनिक तकनीकी क्षमताओं में आगे निकल चुका है।

एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य बढ़त

चीनी लड़ाकू विमान ताइवान, दक्षिण चीन सागर, जापान और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न सैन्य थिएटरों में तैनात हैं। इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ रहा है। वर्तमान में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कोई भी देश सैन्य क्षमता के मामले में चीन को सीधे चुनौती देने की स्थिति में नहीं माना जाता।

भारतीय वायुसेना की स्थिति क्या है?

वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (WDMMA) की रैंकिंग के अनुसार, भारतीय वायुसेना दुनिया की प्रमुख वायु शक्तियों में शामिल है और उसे चौथे स्थान पर रखा जाता है। यह रैंकिंग केवल विमानों की संख्या पर नहीं, बल्कि उनकी आधुनिकता, पायलट प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और स्वदेशी उत्पादन क्षमता जैसे मानकों पर आधारित होती है।

फ्लाइट ग्लोबल और अन्य रक्षा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और ट्रेनर सहित कुल 1,700 से 1,900 सैन्य विमान हैं। इनमें 500 से अधिक लड़ाकू विमान शामिल हैं।

दुनिया की प्रमुख वायुसेनाएं

वर्तमान अनुमानों के अनुसार वायु शक्ति के मामले में शीर्ष देशों की सूची इस प्रकार मानी जाती है:

अमेरिका

चीन

रूस

भारत

चीन की तेजी से बढ़ती वायु शक्ति न केवल रूस के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में वैश्विक सैन्य समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।

SCROLL FOR NEXT