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कड़ी सुरक्षा के बीच खालिदा जिया के जनाजे की नमाज अदा की गई, उमड़ी लाखों की भीड़

समाज के हर वर्ग से आए शोक संतप्त लोगों ने जिया की आत्मा की शांति के लिए दुआ की।

Badrinath Shaw

नई दिल्ली: बांग्लादेश में कड़ी सुरक्षा के बीच पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के जनाजे की नमाज अदा की गई। नमाज-ए-जनाजा बुधवार दोपहर को मानिक मियां एवेन्यू में अदा की गई। बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद के खतीब मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल मलिक ने जनाजे की नमाज अदा की, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्थायी समिति के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने जिया की संक्षिप्त जीवनी पढ़ी। दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली जिया का मंगलवार को ढाका में निधन हो गया था।

मोहम्मद यूनुस सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति हुए शामिल

अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस, प्रधान न्यायाधीश जुबैर रहमान चौधरी और खालिदा जिया के बेटे एवं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान विदेशी गणमान्य व्यक्तियों, अंतरिम सरकार के सलाहकारों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और वरिष्ठ सरकारी एवं सैन्य अधिकारियों के साथ जनाजे की नमाज में शामिल हुए। जिया के बड़े बेटे रहमान ने नमाज से पहले वहां मौजूद लोगों से कहा, ‘‘कृपया अल्लाह से दुआ करें कि उन्हें जन्नत में जगह मिले।’’

लाखों लोग हुए शामिल

बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं जिया की नमाज-ए-जनाजा में लाखों लोग शामिल हुए।समाज के हर वर्ग से आए शोक संतप्त लोगों ने जिया की आत्मा की शांति के लिए दुआ की। राष्ट्रीय ध्वज से ढके जिया के ताबूत को मानिक मियां एवेन्यू के पश्चिमी छोर पर रखा गया है। जनाजे की नमाज के बाद, जिया को उनके पति, पूर्व राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानी जियाउर रहमान की कब्र के बगल में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा। इस दौरान आम जनता को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद राजनीती में आई

सार्वजनिक हस्ती के रूप में जिया का उदय व्यापक रूप से आकस्मिक माना जाता है। जिया ने 35 वर्ष की आयु में विधवा होने के एक दशक बाद प्रधानमंत्री का पद संभाला लेकिन राजनीति में उनका प्रवेश सुनियोजित नहीं था। वर्ष 1981 में एक असफल सैन्य तख्तापलट में उनके पति एवं राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या कर दी गयी थी, जिसके बाद जिया को राजनीति में उतरना पड़ा। इससे पहले तक वह राजनीतिक जगत से अपरिचित रही थीं। उन्होंने जियाउर रहमान द्वारा 1978 में स्थापित बीएनपी पार्टी की शीर्ष नेता के रूप में शीघ्र ही अपनी पहचान बनाई।

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