Imtiaz Ali : 'जब वी मेट' की कहानी 
मनोरंजन

Imtiaz Ali का खुलासा: ट्रेन के सफर और दिवास्वप्नों से निकली 'जब वी मेट' की कहानी

फिल्मकार इम्तियाज अली ने खुलासा किया कि ट्रेन यात्रा के दौरान देखा गया एक दिवास्वप्न आगे चलकर उनकी चर्चित फिल्म 'जब वी मेट' में बदल गया।

नयी दिल्ली : 12 जून फिल्मकार इम्तियाज अली का कहना है कि उनकी लगभग सभी कहानियों की शुरुआत दिवास्वप्नों और कल्पनाओं से होती है।

‘‘जब वी मेट’’ जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक का कहना है कि वह रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों, स्थानों और घटनाओं को देखकर उनके इर्द-गिर्द संभावित कहानियां बुनने लगते हैं।

अली ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से बातचीत में अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में कहा कि किसी विचार के मन में आने के बाद वह लगातार विकसित होता रहता है और वह उसे अपने आसपास के लोगों को सुनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘फिर एक समय ऐसा आता है जब मैं बैठकर उसे लिखता हूं।’’

‘‘हाईवे’’, ‘‘रॉकस्टार’’ और ‘‘अमर सिंह चमकीला’’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने वाले, 54 वर्षीय अली की विशेषता यह भी है कि उन्होंने अपनी लगभग सभी फिल्मों की पटकथा स्वयं लिखी है।

अली ने कहा, ‘‘गालिब ने कहा है, ‘आते हैं ग़ायब से ये मज़ामीन ख़याल में’। हमें नहीं पता कि कहानियां कहां से आती हैं। अधिकतर वे अवचेतन मन से आती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपने आसपास दिखने वाली चीजों से प्रेरणा लेता हूं और फिर उन पर अपनी कल्पना का निर्माण करता हूं।’’

उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव ही दिवास्वप्न देखने वाला है।

अली ने कहा, ‘‘मैं मूल रूप से दिवास्वप्न देखने वाला व्यक्ति हूं। मैं कमरे में बैठकर खुद का मनोरंजन करने के लिए चीजों की कल्पना करता हूं। मैं बचपन से ऐसा करता आया हूं। कक्षाओं में, यात्राओं के दौरान, ट्रेनों में और हर जगह।’’

निर्देशक ने कहा कि किसी व्यक्ति से मुलाकात या किसी दृश्य को देखने के बाद वह उसके बारे में कल्पना करना शुरू कर देते हैं और यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोचता हूं कि आगे क्या हुआ होगा, वे लोग कहां गए होंगे या ट्रेन से दिखने वाले उस घर में कौन रहता होगा। इस तरह कहानियां बनती चली जाती हैं।’’

अली की नई फिल्म ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ की पृष्ठभूमि भारत का विभाजन है। उन्होंने बताया कि दिल्ली और पंजाब में फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अनेक ऐसे लोगों से हुई, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी झेली थी। उनकी यादों और अनुभवों ने इस कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फिल्मकार ने कहा कि उनके कई विचार छात्र जीवन में जमशेदपुर से दिल्ली के बीच की रेल यात्राओं और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के दौरान डीटीसी बसों में किए गए सफर से उपजे।

उन्होंने कहा कि ट्रेन यात्राओं के दौरान अक्सर किसी सहयात्री युवती के साथ नजरों-नजरों में संवाद जैसी स्थिति बन जाती थी और फिर वह कल्पना करते थे कि यदि वे दोनों किसी स्टेशन पर ट्रेन छूट जाने की स्थिति में फंस जाएं तो क्या होगा।

अली ने कहा कि संभवतः इसी कल्पना ने बाद में उनकी चर्चित फिल्म ‘‘जब वी मेट’’ को जन्म दिया, जिसमें करीना कपूर खान और शाहिद कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।

‘‘सोचा ना था’’ से लेकर ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ तक अली की फिल्मों का स्वरूप भले अलग-अलग दिखाई देता हो, लेकिन उनके केंद्र में रिश्ते और मानवीय संबंध ही होते हैं।

उन्होंने कहा कि एक निर्देशक के तौर पर वह चाहते हैं कि उनकी हर फिल्म अलग और विशिष्ट लगे, लेकिन इसके बावजूद उनकी फिल्मों में एक समान सूत्र मौजूद रहता है, जिसे वह पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाते।

अली ने कहा कि उनकी फिल्मों में खलनायक का अभाव भी एक सामान्य विशेषता है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी किसी भी फिल्म में वास्तव में कोई बुरा व्यक्ति नहीं है। मेरे जीवन में जिन लोगों से मैं मिला हूं, वे अंततः पूरी तरह बुरे नहीं निकले। कई बार जिन लोगों को बुरा समझा जाता था, वे वास्तव में अच्छे और कभी-कभी अकेले भी निकले।’’

एक अच्छी फिल्म की परिभाषा पूछे जाने पर अली ने कहा कि फिल्म के सभी तत्वों का एक साझा दृष्टिकोण के साथ सामंजस्य होना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे करियर की शुरुआत में किसी ने मुझसे कहा था कि टिकट पर जो कर कटता है, वह मनोरंजन के लिए होता है। इसलिए आपकी फिल्म मनोरंजक होनी चाहिए।’’

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