टाटा मोटर्स लगाएगी 86 मेगावाट की पवन-सौर ऊर्जा परियोजना 
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टाटा मोटर्स लगाएगी 86 मेगावाट की पवन-सौर ऊर्जा परियोजना, चार संयंत्रों को मिलेगी हरित बिजली

झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक स्थित टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल प्लांट्स को हरित बिजली आपूर्ति के लिए 86 मेगावाट की पवन-सौर परियोजना, कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में अहम कदम

नई दिल्ली : टाटा मोटर्स ने अपने वाणिज्यिक वाहन (कमर्शियल व्हीकल) संयंत्रों को हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए वेलस्पन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मिलकर 86 मेगावाट क्षमता की पवन-सौर (विंड-सोलर) हाइब्रिड परियोजना विकसित करेंगी, जिससे टाटा मोटर्स के चार विनिर्माण संयंत्रों को स्वच्छ बिजली मिलेगी।

दोनों कंपनियों के बीच इस परियोजना के लिए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौता (पावर परचेज एग्रीमेंट) हुआ है। परियोजना से झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक स्थित टाटा मोटर्स के वाणिज्यिक वाहन संयंत्रों को बिजली आपूर्ति की जाएगी।

हर साल 20 करोड़ यूनिट उत्पादन का लक्ष्य

परियोजना शुरू होने के बाद हर वर्ष लगभग 20 करोड़ यूनिट (200 मिलियन यूनिट) नवीकरणीय बिजली का उत्पादन होने का अनुमान है। कंपनी के अनुसार, इससे हर साल 1.4 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

यह परियोजना पवन और सौर ऊर्जा, दोनों स्रोतों का उपयोग करेगी। इससे केवल एक स्रोत पर आधारित परियोजनाओं की तुलना में बिजली की आपूर्ति अधिक स्थिर और भरोसेमंद रहेगी। परियोजना में दोनों कंपनियां संयुक्त निवेश करेंगी और बिजली की आपूर्ति दीर्घकालिक समझौते के तहत होगी।

2030 तक शत प्रतिशत नवीकरणीय बिजली उपयोग का लक्ष्य

टाटा मोटर्स के परिचालन उपाध्यक्ष विशाल बदशाह ने कहा कि यह एकीकृत पवन-सौर समाधान कंपनी के प्रमुख वाणिज्यिक वाहन संयंत्रों को विश्वसनीय हरित ऊर्जा उपलब्ध कराएगा और विनिर्माण गतिविधियों को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद करेगा।

यह पहल टाटा मोटर्स के आरई100 (RE100) लक्ष्य का भी हिस्सा है। कंपनी का उद्देश्य वर्ष 2030 तक अपनी सभी परिचालन गतिविधियों में 100 प्रतिशत नवीकरणीय बिजली का उपयोग करना है।

कार्बन उत्सर्जन कम करने में मिलेगी मदद

वेलस्पन रिन्यूएबल एनर्जी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कपिल माहेश्वरी ने कहा कि यह साझेदारी केवल बिजली आपूर्ति का समझौता नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन कम करने और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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