सांकेतिक तस्वीर सरकार ने जेट फ्यूल 5 रुपये प्रति लीटर किया सस्ता
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एयरलाइन कंपनियों को राहत : जेट फ्यूल 5 रुपये प्रति लीटर सस्ता, घटेगा ऑपरेशनल खर्च

सरकार के फैसले से एटीएफ की कीमतों में कमी, घरेलू एयरलाइंस के परिचालन खर्च पर से दबाव घटेगा, किराए स्थिर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली : सरकार ने बुधवार को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में एटीएफ की कीमत घटकर करीब 110 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इस फैसले से घरेलू एयरलाइन कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि उनके परिचालन खर्च में कमी आएगी और बढ़ती लागत का दबाव कुछ हद तक कम होगा।

पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार घटी ATF की कीमत

पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और कच्चे तेल की महंगी कीमतों के चलते जेट फ्यूल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। ऐसे हालात के बाद पहली बार सरकार ने एटीएफ की कीमतों में कटौती की है। इससे एक दिन पहले ही सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाली नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी कमी की थी। हालांकि, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हर 15 दिन में होती है ड्यूटी की समीक्षा

सरकार हर दो सप्ताह में पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों का आकलन किया जाता है। इससे पहले इन दरों में संशोधन 16 जून को किया गया था।

एयरलाइन कंपनियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

एटीएफ किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल परिचालन खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। आमतौर पर कुल लागत का 40 प्रतिशत से अधिक खर्च सिर्फ ईंधन पर आता है। ऐसे में जेट फ्यूल की कीमतों में आई कमी से एयरलाइन कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट में उल्लेखनीय गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति को भी सहारा मिलेगा।

बढ़ती लागत और एयर स्पेस प्रतिबंधों से बढ़ी थीं मुश्किलें

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कई देशों के एयर स्पेस पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके चलते एयरलाइनों को लंबी दूरी वाले वैकल्पिक मार्गों से उड़ानें संचालित करनी पड़ीं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई। दूसरी ओर, कच्चे तेल की महंगाई के कारण एटीएफ की कीमतों में भी तेज उछाल आया। इन दोनों वजहों ने एयरलाइन कंपनियों पर दोहरा आर्थिक दबाव बना दिया था।

बढ़ती लागत के चलते उड़ानों में करनी पड़ी थी कटौती

ईंधन की बढ़ती कीमतों और एयर स्पेस प्रतिबंधों का असर उड़ान संचालन पर भी पड़ा। टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया ने पिछले महीने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में करीब 27 प्रतिशत तक कटौती की थी। वहीं, बढ़ती लागत का असर कम करने के लिए कंपनी ने घरेलू उड़ानों में भी अस्थायी रूप से लगभग 22 प्रतिशत की कमी की थी। अब एटीएफ की कीमतों में आई राहत से एयरलाइन कंपनियों को परिचालन सामान्य करने और लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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