केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को मंजूरी दे दी 
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कैबिनेट ने ISM 2.0 को दी मंजूरी, 1.25 लाख करोड़ रुपये से बढ़ेगा सेमीकंडक्टर मिशन

सरकार का दीर्घकालिक रोडमैप तैयार, ISM 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए अवधि बढ़ी और भारी निवेश का प्रावधान

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को मंजूरी दे दी। सूत्रों के अनुसार, इस मिशन के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही मिशन की अवधि पांच वर्ष से बढ़ाकर 12 वर्ष कर दी गई है, ताकि निवेशकों को दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता मिल सके और देश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित हो।

नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना को भी मंजूरी

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ISM 2.0 का उद्देश्य चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग के साथ-साथ सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP) के विकास को बढ़ावा देना है।

दिसंबर 2021 में मंजूर ISM 1.0 के तहत 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके तहत करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी, जिनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर इकाइयां और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट ने नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना को भी मंजूरी दी है।

जारी रहेगी यूरिया सब्सिडी

इसके अलावा, सरकार ने यूरिया क्षेत्र के लिए नई निवेश नीति और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यूरिया सब्सिडी जारी रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। वर्तमान में भारत में यूरिया उत्पादन में सालाना करीब एक करोड़ टन की कमी है, जिसकी पूर्ति आयात से की जाती है।

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