नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) से युवाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने के लिए कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कौशल केंद्रों तक पहुंच बनाने को कहा है। उन्होंने 2 अक्टूबर से एक महीने के ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान का प्रस्ताव रखा।
पीएसबी कॉन्क्लेव 2026 में बैंक प्रमुखों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के साथ ‘कैंपस से करियर’ तक लंबे समय का संबंध बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि युवा डिजिटल सेवाओं के आदी हैं और उनसे जुड़ने के लिए बैंकों को सरल, सुविधाजनक और व्यक्तिगत सेवाएं देनी होंगी। उन्होंने बताया कि UPI के 66 प्रतिशत लेनदेन 18-29 वर्ष के लोगों द्वारा किए जाते हैं।
उन्होंने बैंकों को फिटनेस और वेलनेस जैसी सेवाओं के वाउचर समेत युवाओं की जरूरतों से जुड़े लाभ देने का सुझाव दिया।
सीतारमण ने कहा कि बैंकों को शाखाओं में ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसी सुविधाएं शुरू करनी चाहिए, जहां युवा खाता खोलने, क्रेडिट, क्रेडिट स्कोर और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से हासिल कर सकें।
उन्होंने युवाओं के लिए वेब और मोबाइल आधारित पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया, जिसमें KYC, सुरक्षित बैंकिंग, शिक्षा, कौशल विकास, वित्त और उद्यमिता से जुड़ी सरल जानकारी उपलब्ध हो।
प्रस्तावित अभियान में 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के युवाओं को लक्षित करने की योजना है। सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं तक आने का इंतजार करने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में जाकर उनसे जुड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक महीने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं के साथ लंबे समय तक जुड़ाव की शुरुआत बनना चाहिए। बैंकों को युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, निवेश और संपत्ति निर्माण के अलग-अलग चरणों में भरोसेमंद वित्तीय साझेदार बनना चाहिए।
वित्त मंत्री ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों की सफलता केवल ऋण के लक्ष्य पूरे करने से नहीं, बल्कि समय पर, पर्याप्त और उत्पादक कर्ज उपलब्ध कराने से तय होनी चाहिए।
उन्होंने दालों और तिलहनों के लिए लक्षित कृषि वित्त बढ़ाने तथा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अनुरूप ऋण देने की जरूरत बताई। छोटे और सीमांत किसानों के लिए स्थानीय फसल, जल उपलब्धता, जलवायु और उत्पादन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ऋण व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया।