AI उथल-पुथल के बीच विदेशी निवेशकों की नजर फिर भारतीय शेयर बाजार पर 
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AI उथल-पुथल के बीच विदेशी निवेशकों की पसंद बन रहा भारत

AI आधारित दिग्गज कंपनियों की कमी से पिछड़ता भारत अब कम जोखिम और विविध सेक्टरों में अवसरों की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की नई पसंद बन रहा है

Goutam Ojha

नई दिल्ली : वैश्विक शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस साल AI आधारित कंपनियों की कमी के कारण भारत वैश्विक रैली से काफी हद तक बाहर रहा, लेकिन अब यही वजह भारतीय बाजार को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प बना रही है।

2026 की पहली छमाही में चाल निफ्टी 50 की चाल रही बेहतर

साल 2026 की पहली छमाही में निफ्टी 50 में 1% या उससे अधिक की दैनिक चाल केवल करीब एक-तिहाई कारोबारी सत्रों में देखने को मिली। यह उतार-चढ़ाव MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स और दक्षिण कोरिया व ताइवान जैसे बाजारों की तुलना में काफी कम रहा। खासकर दक्षिण कोरिया का कोस्पी इस दौरान सबसे अधिक अस्थिर रहा, जहां दो-तिहाई कारोबारी दिनों में 1% से ज्यादा का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

AI ट्रेड पर अत्यधिक निर्भर न होना भारत की ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह AI ट्रेड पर अत्यधिक निर्भर नहीं है। दुबई स्थित Arkevium Capital के मुख्य निवेश अधिकारी मैक्सेंस विसो का कहना है कि भारत उभरते बाजारों में AI जोखिम के खिलाफ एक संतुलित विकल्प बनकर उभरा है।

जून में बाजार की स्थिति हुई मजबूत

जून में भारतीय बाजार की स्थिति और मजबूत हुई। निफ्टी 50 ने नवंबर के बाद पहली बार MSCI Emerging Markets Index से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी पिछले चार महीनों में सबसे कम रही। इसके पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और रुपये में स्थिरता जैसे प्रमुख कारण रहे।

निवेशकों की नजर पहली तिमाही के नतीजों पर

विश्लेषकों का कहना है कि कमोडिटी कीमतों में गिरावट से भारत के आर्थिक परिदृश्य में तेजी से सुधार आया है। इससे महंगाई पर दबाव घटा है, पूंजी प्रवाह बेहतर हुआ है और कॉरपोरेट आय में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे के अनुमान घटने के बजाय बढ़ सकते हैं।

अब निवेशकों की नजर पहली तिमाही के नतीजों पर है, जिसकी शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) करेगी। बाजार को उम्मीद है कि बेहतर कॉरपोरेट नतीजे भारतीय शेयर बाजार को आगे भी मजबूती दे सकते हैं।

अब एक बड़ा मैक्रो एसेट क्लास बन चुका है भारत

मॉर्गन स्टेनली ने भी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत अब एक बड़ा मैक्रो एसेट क्लास बन चुका है। स्थिर महंगाई, मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता भारतीय बाजार को अन्य उभरते बाजारों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती है। पिछले दस वर्षों में निफ्टी 50 लगभग तीन गुना बढ़ चुका है और छह अलग-अलग वर्षों में 10% से अधिक का वार्षिक रिटर्न दे चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी, स्थिर ब्याज दरें और AI शेयरों में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत एक बार फिर वैश्विक निवेशकों के लिए अलग और अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश अवसर बनकर उभर रहा है।

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