प्रशांत किशोर -
बिहार

बांकीपुर उपचुनाव : प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प

कम मतदान वाले बांकीपुर में परंपरागत समर्थन बनाम बदलाव की चाह पर सबकी नजर

पटना : बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सरकार का नेतृत्व करने का अवसर भले ही हाल में मिला हो, लेकिन बांकीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी का दबदबा कई दशकों से कायम है और वह यहां लगातार बड़े अंतर से जीत दर्ज करती रही है।

इसी वजह से जब बांकीपुर से लगातार पांच बार विधायक रहे नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए तो 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव को पार्टी, खासकर हाल में राज्य की सत्ता की अगुवाई मिलने से उत्साहित प्रदेश इकाई, आसान मुकाबला मान रही थी।

इस सीट पर भाजपा के आत्मविश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने ऐसी सीट से, जिसे वह किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहेगी, अपने युवा मोर्चा के अपेक्षाकृत कम चर्चित नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के मजबूत संगठनात्मक तंत्र का साथ न होता तो अन्य दावेदार उन्हें शायद कमजोर उम्मीदवार मानते।

भाजपा के इस आत्मविश्वास को सबसे बड़ी चुनौती जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से मिल रही है, जो पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के खाता नहीं खोल पाने के बाद उसमें नयी ऊर्जा भरने की कोशिश में स्वयं मैदान में उतरे हैं।

किशोर चुनाव प्रचार के दौरान लगातार कहते रहे हैं, बांकीपुर के चार लाख मतदाता सिर्फ एक विधायक नहीं चुनेंगे। अगर मैं जीतता हूं तो सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। विधानसभा के भीतर जन सुराज पार्टी का एकमात्र विधायक भी बाकी 242 विधायकों के संयुक्त प्रभाव से अधिक महत्व रखेगा।

चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी जैसे नेताओं के साथ काम कर चुके हैं, 49 वर्षीय किशोर पिछले विधानसभा चुनाव में स्वयं मैदान में नहीं उतरे थे। माना जाता है कि उनके इस फैसले से ‘राजनीतिक विकल्प’ देने के उनके दावे को लेकर मतदाताओं में निराशा पैदा हुई थी।

बांकीपुर में प्रचार के दौरान वह मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह उपचुनाव ‘बिहार की भाजपा नीत सरकार पर जनमत संग्रह है’ और इसके लिए वह राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों का सहारा ले रहे हैं।

किशोर कहते हैं, जिन लोगों ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सत्ता में आने पर ‘जंगलराज’ लौटने के डर से भाजपा को वोट दिया था, उन्हें अब चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को विधानसभा में भारी बहुमत प्राप्त है। जन सुराज की जीत से सरकार नहीं बदलेगी।

वहीं मुस्लिम मतदाताओं से वह कहते हैं, आप राजद को इसलिए वोट देते रहे कि BJP सत्ता से दूर रहे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बार बदलाव के लिए जन सुराज पार्टी को समर्थन दें।

किशोर का एक और तर्क है, मुझे पता है कि यहां अधिकांश लोग सम्राट चौधरी से खुश नहीं हैं, लेकिन आप यह बात सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नहीं कह सकते। मुझे वोट दीजिए, संदेश उन तक पहुंच जाएगा।

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