कितना आसान था इक प्यार जताना...

कविता
Poem
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कितना आसान था
इक प्यार जताना
जैसे
गले लगाना,
पीठ थपथपाना,
सर पे हाथ रखना,
हाथों में हाथ रखना
काँधे पर हाथ रखना,
बालों को सँवारना,
बाहों में भर लेना,
गोद मे सर रख लेना,
नज़रे उतारना,
अपलक देखना,
रो देना,
हँस देना,
थप्पड़ लगा देना,
आँखें मूंद लेना,
चेहरा बना लेना,
झटक देना,
मुह फेर लेना,
गालों को चूम लेना,
माथे को चूम लेना,
होठों को चूम लेना,

या फिर कोई गीत गुनगुनाना,
संग नाचना,
संग पहाड़ों पर जाना,
संग जंगलों में गम हो जाना,
संग नदियों के बहाव को देर तलक़ देखना,
संग तारों की गिनती करना

या कोई किताब थमाना,
फ़ूल थमाना,
कविताएँ समर्पित करना,
अपने ख़्वाब बताना,
अपने राज़ बताना,
पसंद के कपड़े पहनना,

बातें करना,
बेहद बातें करना
या बस चुप रहना....

पर हम मानव ने स्वर समझा,
अक्षर लिखे, शब्द बनाया...
भाषा को उत्कृष्ट बनाया
और सीखा इज़हार करना कि-
"मुझे तुमसे प्यार है!"

फ़िर कमबख़्त वही कहने से रह गया...।

Poem
दीपक मालाकार “माज़ी”
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