42 साल पहले जिसने उड़ना सिखाया, उसी गुरु के साथ आखिरी उड़ान पर निकले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह

रिटायरमेंट से पहले हैदराबाद में पूरी की आखिरी फ्लाइंग सॉर्टी, 55 मिनट तक किरन विमान में भरी उड़ान; बोले- ‘ड्रीम कम ट्रू’, लैंडिंग पर दिया गया वॉटर कैनन सैल्यूट
42 साल पहले जिसने उड़ना सिखाया, उसी गुरु के साथ आखिरी उड़ान पर निकले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
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भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने चार दशक से अधिक लंबे उड़ान करियर को एक यादगार अंदाज में अलविदा कहा। मंगलवार, 20 अक्टूबर को उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में एचजेटी-16 किरन एमके-1 ट्रेनर विमान से अपनी आखिरी उड़ान भरी। इस उड़ान को खास बनाने वाली बात यह थी कि उनके साथ वही प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) मौजूद थे, जिन्होंने 42 साल से भी पहले उन्हें पहली बार विमान उड़ाना सिखाया था। अपनी पहली उड़ान से लेकर आखिरी सॉर्टी तक का यह सफर एक ही विमान और उसी प्रशिक्षक के साथ पूरा करना एयर चीफ मार्शल सिंह के लिए भावुक पल बन गया।

42 साल बाद उसी विमान में लौटे

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की यह उड़ान लगभग 55 मिनट तक चली। उन्होंने किरन विमान में उड़ान भरी, जो भारतीय वायुसेना में पायलटों को शुरुआती प्रशिक्षण देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विमान का टेल नंबर यू 707 था। इस दौरान उनके साथ विंग कमांडर वीएस कोचर मौजूद रहे।

सिंह ने अपनी पहली फ्लाइंग सॉर्टी 28 जनवरी 1984 को इसी एयर फोर्स अकादमी में किरन विमान से की थी। उस समय उनके प्रशिक्षक कोचर ही थे। चार दशक से अधिक समय बाद उसी विमान श्रेणी में उसी प्रशिक्षक के साथ उड़ान भरना उनके करियर के एक पूरे चक्र के पूरा होने जैसा था। उड़ान पूरी करने के बाद सिंह ने इसे अपने लिए सपने के सच होने जैसा बताया। उन्होंने अपने प्रशिक्षक के प्रति आभार जताया और कहा कि वह चाहते थे कि उनकी उड़ान यात्रा की शुरुआत और उसका समापन एक खास जुड़ाव के साथ हो।

‘ड्रीम कम ट्रू’, गुरु के प्रति जताया आभार

उड़ान के बाद पत्रकारों से बातचीत में एपी सिंह ने कहा कि यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी उड़ान यात्रा इसी विमान से शुरू की थी और अब उसी विमान से वर्दी में अपनी आखिरी उड़ान पूरी की। उन्होंने अपने प्रशिक्षक विंग कमांडर कोचर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें शुरुआती दिनों में इसी जगह उड़ना सिखाया था। सिंह के लिए यह केवल एक औपचारिक विदाई नहीं थी, बल्कि उस सफर को याद करने का अवसर भी था, जिसने उन्हें भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च पद तक पहुँचाया।

विंग कमांडर कोचर, जिनकी उम्र 73 वर्ष है, ने भी इस मौके पर खुशी जताई। उन्होंने अपने पूर्व छात्र के साथ एक बार फिर उड़ान भरने को यादगार अनुभव बताया और सिंह की तारीफ की। गुरु और शिष्य की यह मुलाकात वायुसेना में प्रशिक्षण देने वाले अधिकारियों की भूमिका और उनके लंबे समय तक बने रहने वाले संबंधों को भी सामने लाती है।

लैंडिंग पर मिला वॉटर कैनन सैल्यूट

आखिरी सॉर्टी पूरी कर विमान के उतरने के बाद एयर चीफ मार्शल सिंह को वॉटर कैनन सैल्यूट दिया गया। यह सम्मान विमान के दोनों ओर से पानी की ऊँची धाराएँ बनाकर दिया जाता है और विशेष अवसरों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह उड़ान उनके उड़ान करियर के समापन का प्रतीक बनी। हालाँकि, विमान उड़ाने से जुड़े इस अध्याय के समाप्त होने का अर्थ भारतीय वायुसेना में उनकी जिम्मेदारियों का तत्काल अंत नहीं है। सिंह 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

इससे पहले तेजस में भरी थी आखिरी फाइटर उड़ान

किरन विमान में आखिरी उड़ान से पहले एपी सिंह 12 अक्टूबर को स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में अपनी अंतिम फाइटर जेट सॉर्टी भी पूरी कर चुके थे। यह उड़ान राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर ‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान हुई थी। तेजस की उड़ान उनके लड़ाकू विमान उड़ाने के अनुभव से जुड़ी थी, जबकि किरन में आखिरी सॉर्टी ने उनके प्रशिक्षण के शुरुआती दिनों की यादें ताजा कर दीं। दोनों उड़ानों ने उनके लंबे करियर के अलग-अलग पड़ावों को जोड़ दिया।

31 अक्टूबर को रिटायर होंगे एपी सिंह

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख हैं। वह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे। उनके बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। दीक्षित फिलहाल वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं।

एपी सिंह की आखिरी उड़ान की खासियत सिर्फ यह नहीं थी कि उन्होंने चार दशक से अधिक समय बाद किरन विमान में उड़ान भरी। इसकी सबसे भावुक बात यह रही कि उनके साथ वही प्रशिक्षक थे, जिन्होंने उनके उड़ान करियर की पहली सीढ़ी पर उनका मार्गदर्शन किया था। 1984 में शुरू हुआ यह सफर 2026 में उसी विमान श्रेणी और उसी गुरु के साथ एक यादगार मोड़ पर पहुँचा।

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