

वॉशिंगटन : अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति को बड़ा झटका दिया है। उनकी रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत गंवाना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने न केवल कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल किया, बल्कि टेक्सास, ओहायो, नॉर्थ कैरोलाइना और साउथ कैरोलाइना जैसे राज्यों में भी अहम जीत दर्ज की। इन चुनावों में कई ऐसे उम्मीदवार भी जीते, जिनकी जीत अमेरिकी राजनीति में नई शुरुआत मानी जा रही है। न्यू हैम्पशायर से क्रिस पैपस देश के पहले खुले तौर पर समलैंगिक पुरुष सांसद बने, जिन्हें सीनेट के लिए चुना गया है। वहीं मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं।
क्या होते हैं मध्यावधि चुनाव और क्यों हैं अहम?
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में, यानी दो साल पूरे होने पर होने वाले चुनावों को मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। इस बार चुनाव 3 नवंबर 2026 को हुए। इनमें राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों और कई राज्यों के गवर्नर तथा स्थानीय प्रतिनिधियों को चुना जाता है।
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं। पहला है सीनेट, जिसमें कुल 100 सदस्य होते हैं और प्रत्येक का कार्यकाल छह साल का होता है। हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। दूसरा है प्रतिनिधि सभा, जिसमें 435 मतदान करने वाले सदस्य होते हैं। इसके सभी सदस्यों का चुनाव हर दो साल में होता है। इस बार सीनेट की 33 नियमित सीटों और एक विशेष चुनाव सहित कई सीटों पर मतदान हुआ, जबकि प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों पर चुनाव कराया गया।
मध्यावधि चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके नतीजे बताते हैं कि राष्ट्रपति के कामकाज को लेकर जनता का रुख क्या है। यदि राष्ट्रपति की पार्टी दोनों सदनों में बहुमत खो देती है, तो विपक्षी दल उसके विधेयकों और फैसलों को रोक सकता है। साथ ही सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों पर सवाल उठा सकता है और प्रशासन के कामकाज की जांच के लिए संसदीय समितियों का इस्तेमाल कर सकता है।
ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवारों को चार राज्यों में हार
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा यह रही कि ट्रंप ने जिन रिपब्लिकन उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन किया था, उनमें से कई को हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से अपील की थी कि वे ऐसा समझकर मतदान करें जैसे ट्रंप खुद चुनाव लड़ रहे हों। लेकिन नतीजे उनकी अपील के अनुरूप नहीं रहे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कैरोलाइना, नॉर्थ कैरोलाइना, टेक्सास और मिशिगन में ट्रंप के समर्थन वाले सीनेट उम्मीदवार हार गए। साउथ कैरोलाइना में ट्रंप ने डार्लिन ग्राहम का समर्थन किया था, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज ने उन्हें हरा दिया। एंड्रयूज बाल रोग विशेषज्ञ हैं और इस जीत के साथ वह साउथ कैरोलाइना से सीनेट पहुंचने वाली पहली महिला बन गई हैं।
नॉर्थ कैरोलाइना में ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवार माइकल व्हाटली को पूर्व डेमोक्रेटिक गवर्नर रॉय कूपर ने हराया। टेक्सास में ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर पूर्व सीनेटर जॉन कॉर्निन के बजाय अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन का समर्थन किया था। लेकिन डेमोक्रेट जेम्स टालारिको ने पैक्सटन को हरा दिया। मिशिगन में पूर्व सांसद माइक रोजर्स को अब्दुल अल-सैयद ने पराजित किया।
टेक्सास में 38 साल बाद डेमोक्रेट्स की वापसी
टेक्सास को लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे राज्य में डेमोक्रेट्स की जीत को चुनाव की सबसे बड़ी घटनाओं में गिना जा रहा है। जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराकर अमेरिकी सीनेट की सीट जीती। वर्ष 1988 के बाद यह पहली बार है, जब टेक्सास से किसी डेमोक्रेट को सीनेट के लिए चुना गया है।
राज्य के गवर्नर पद पर भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराया। इस जीत के साथ वह टेक्सास की पहली लैटिना गवर्नर बनने जा रही हैं। राज्य में 1990 के बाद पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी का गवर्नर चुना गया है। टेक्सास में कांग्रेस की कुछ सीटों पर भी डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की। गायक बॉबी पुलिडो ने रिपब्लिकन सांसद मोनिका डी ला क्रूज को हराकर टेक्सास के 15वें संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की। वह पहली बार किसी निर्वाचित पद पर पहुंचे हैं।
ओहायो, आयोवा और अन्य राज्यों में भी बड़े उलटफेर
ओहायो में डेमोक्रेट शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन जॉन हस्टेड को हराकर सीनेट की सीट जीती। यह मुकाबला चुनाव के सबसे महंगे मुकाबलों में रहा, जिसमें उम्मीदवारों और उनके समर्थक संगठनों ने मिलाकर 500 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए।
आयोवा में डेमोक्रेट जोश ट्यूरेक ने रिपब्लिकन पार्टी की सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने सेवानिवृत्त हो रहीं रिपब्लिकन सीनेटर जोनी अर्न्स्ट की जगह ली। कंसास में एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को हराया। मेन में ट्रॉय जैक्सन ने रिपब्लिकन सीनेटर सुसन कॉलिन्स को पराजित किया। इन राज्यों में जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत की।
पहली बार खुले तौर पर समलैंगिक पुरुष सीनेट पहुंचे
इन चुनावों का एक ऐतिहासिक पहलू सामाजिक प्रतिनिधित्व भी रहा। न्यू हैम्पशायर से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस पैपस ने रिपब्लिकन जॉन सुनुनू को हराया। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले खुले तौर पर समलैंगिक पुरुष बन गए। पैपस पहले प्रतिनिधि सभा के सदस्य थे। उनकी जीत को अमेरिका की राजनीति में एलजीबीटीक्यू समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इंडियाना में डेमोक्रेट जेडी फोर्ड ने रिपब्लिकन सांसद विक्टोरिया स्पार्ट्ज को हराकर प्रतिनिधि सभा की सीट जीती। वह इंडियाना से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाले पहले खुले तौर पर समलैंगिक सांसद बन गए। जॉर्जिया में बेंटले हडजिन्स ने राज्य विधानसभा की सीट जीतकर वहां के पहले खुले तौर पर ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी विधायक बनने का इतिहास बनाया। डेलावेयर से ट्रांसजेंडर सांसद सारा मैकब्राइड ने भी प्रतिनिधि सभा में अपनी सीट बरकरार रखी।
महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम भी कई उपलब्धियां
जॉर्जिया में डेमोक्रेट कीशा लांस बॉटम्स ने गवर्नर का चुनाव जीता। वह अमेरिका के इतिहास में किसी राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनने जा रही हैं। न्यू मैक्सिको में डेब हालैंड पहली मूल अमेरिकी महिला गवर्नर चुनी गईं। टेक्सास की जीना हिनोजोसा पहली लैटिना गवर्नर होंगी।
मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद ने जीतकर अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति बनने का गौरव हासिल किया। मिनेसोटा में पेगी फ्लानागन पहली मूल अमेरिकी महिला सीनेटर बनने जा रही हैं। फ्लोरिडा में रिपब्लिकन उम्मीदवार बायरन डोनाल्ड्स ने गवर्नर का चुनाव जीतकर राज्य के पहले अश्वेत गवर्नर बनने का इतिहास रचा। यानी ऐतिहासिक उपलब्धियां केवल डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं रहीं।
आखिर मतदाताओं ने क्यों बदला रुख?
एसोसिएटेड प्रेस के मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें और आर्थिक दबाव चुनाव में अहम मुद्दे रहे। ईंधन, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बढ़ने से मतदाताओं में नाराजगी थी। इसके अलावा ईरान के साथ युद्ध, ट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति, आव्रजन कार्रवाई और सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवालों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि ट्रंप की ओर से उम्मीदवारों के चयन में दखल और रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मतभेद भी नुकसान का कारण बने। हालांकि चुनाव परिणामों को किसी एक मुद्दे का नतीजा नहीं कहा जा सकता। मतदाताओं की आर्थिक चिंताएं और सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष कई राज्यों में सामने आया।
अब ट्रंप के सामने क्या चुनौती होगी?
कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रंप के कार्यकाल के बाकी दो साल पहले से अलग होंगे। विपक्षी पार्टी उनके प्रस्तावित कानूनों को रोक सकती है, प्रशासनिक नियुक्तियों पर अड़चन डाल सकती है और सरकारी कामकाज की जांच कर सकती है। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज के अगले वर्ष सदन का अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है। ऐसा होने पर वह अमेरिकी इतिहास के पहले अश्वेत स्पीकर होंगे। हालांकि इसके लिए नए सदन में औपचारिक मतदान होना बाकी है।
मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि राष्ट्रपति तत्काल अपनी शक्तियां खो देंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है और ट्रंप 2028 तक पद पर बने रहेंगे। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस में विपक्ष के बहुमत के बीच वह अपनी नीतियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।