जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर हंगामा

CM ने पेश किए 5 विधेयक
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विधानसभा को संबोधित करते हुए
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विधानसभा को संबोधित करते हुए
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श्रीनगर (जेके ब्यूरो): जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग वाले प्रस्ताव को लेकर भारी हंगामा हुआ। भाजपा सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के आसन के पास प्रदर्शन किया, कागज फाड़े और समानांतर कार्यवाही चलाने लगे। भाजपा ने अध्यक्ष के खिलाफ पद से हटाने का प्रस्ताव भी पेश किया और कहा कि प्रस्ताव में स्वायत्तता तथा विशेष दर्जे का उल्लेख संविधान के अनुरूप नहीं है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने राज्य का दर्जा बहाल करने के केंद्र के कथित वादे का हवाला देते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।


उमर अब्दुल्ला ने 5 विधेयक पेश किए

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में पांच विधेयक पेश किए, जिनमें मंत्रियों और विधायकों के वेतन में संशोधन तथा कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने से जुड़े विधेयक शामिल हैं।

उमर अब्दुल्ला ने तीन अलग-अलग विधेयक पेश किए, जिनमें जम्मू कश्मीर मंत्री और राज्य मंत्री वेतन अधिनियम, 1956; जम्मू कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य वेतन और भत्ते अधिनियम, 1960; तथा जम्मू कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984 में संशोधन का प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने अनुमति आधारित नियंत्रण को नियम आधारित शासन से बदलने के लिए कानून को एकीकृत और संशोधित करने संबंधी एक विधेयक भी पेश किया। इसका उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को भरोसे के साथ योजना बनाने, निवेश करने और काम करने में सक्षम बनाना तथा केंद्र शासित प्रदेश में कारोबार सुगमता और जीवन सुगमता को बढ़ावा देना है ताकि जम्मू कश्मीर में रोजगार पैदा हों, निवेश आकर्षित हो और दीर्घकालिक आर्थिक विकास बना रहे। अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन से संबंधित एक विधेयक भी पेश किया।

अब्दुल्ला का प्रस्ताव संविधान का ‘ उल्लंघन ’ : सुनील शर्मा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए पेश किया गया प्रस्ताव संविधान का ‘‘उल्लंघन’’ है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। शर्मा ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलेगा क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एजेंडे में है लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) अपना एजेंडा इसमें जबरन शामिल करके इस प्रक्रिया को ‘‘बाधित’’ करना चाहती है।

सुनील शर्मा ने विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले पत्रकारों से कहा कि अनुच्छेद 370 को वापस लाने या ‘‘दो झंडे’’ और ‘‘दो संविधान’’ की बात करना देश के संविधान का अपमान है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ अपनी बैठक का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि उन दोनों ने इस बारे में चर्चा की कि ‘‘यहां सत्तारूढ़ दल जम्मू-कश्मीर को फिर से 1953 से पहले की स्थिति और अनुच्छेद 370 से जुड़े पुराने नारों की ओर ले जाने की कोशिश कैसे कर रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या आप अब भी जम्मू-कश्मीर को 70-80 साल पीछे धकेलना चाहते हैं? उस दौर में, जब खून-खराबा हुआ और इतने लोगों ने जान गंवाई-क्या जम्मू-कश्मीर सरकार इसे वहीं ले जाना चाहती है? जब भी स्थानीय लोग उमर अब्दुल्ला को उनके वादों की याद दिलाते हैं, वे उस पर अनुच्छेद 370 और 1953 से पहले की स्थिति की बात करके पर्दा डाल देते हैं।’’

विपक्ष के नेता ने कहा कि 2000 में जब केंद्र की भाजपा सरकार ने स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर ‘‘कूड़ेदान में फेंक दिया था’’, तब नेकां ‘‘भाजपा की गोद में बैठी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज आपको इसकी याद क्यों आ रही है? आज आपको इसकी याद इसलिए आ रही है क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग आपसे पानी, बिजली और सड़क मांग रहे हैं।’’

शर्मा ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री ने इस पर ‘‘गंभीर नाराजगी’’ जताई और कहा कि अनुच्छेद 370 या 1953 से पहले की स्थिति की चर्चा का ‘‘जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अब कोई स्थान नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि राज्य का दर्जा मिलना उचित है-यह भारत सरकार की प्रतिबद्धता है। हमने यहां भी दोहराया है कि आगे आइए, इस पर बहस कीजिए। राज्य का दर्जा मिलेगा; यह हमारा एजेंडा है, आपका (नेकां का) नहीं। आप अपना एजेंडा जबरन इसमें शामिल करके इसे बाधित करना चाहते हैं। जब आप 1953 से पहले की स्थिति या अनुच्छेद 370 की बात करते हैं तो राज्य का दर्जा बहाल करने का हमारा मौजूदा एजेंडा बाधित होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप यहां दो झंडों की बात कैसे कर सकते हैं? दो संविधान की बात कैसे कर सकते हैं? किसी भी परिस्थिति में ऐसा नहीं हो सकता। यह अपमानजनक है-यह भारत के संविधान का अपमान है और उसकी मूल भावना के विपरीत है।’’

शर्मा ने कहा, ‘‘भारत का संविधान यहां क्यों लागू नहीं होना चाहिए? क्या इसलिए कि राज्य में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है? भारत के अन्य सभी राज्यों में संविधान लागू होगा लेकिन यहां सिर्फ मुस्लिम बहुमत होने के कारण लागू नहीं होगा? यह ‘द्विराष्ट्र सिद्धांत’ जिन्ना का था, जिन्होंने भारत का विभाजन कराया। अब्दुल्ला सरकार चीजों को फिर उसी द्विराष्ट्र सिद्धांत की ओर ले जाना चाहती है। इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।’’

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सवाल पर शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने का कांग्रेस को कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस वही पार्टी है जिसने भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी. एन. शेषन को (लालकृष्ण) आडवाणी के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस वही पार्टी है जिसने भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एम. एस. गिल को केंद्रीय मंत्री बनाया। उनके पास बोलने का क्या नैतिक आधार है? उन्होंने चार दशक तक भारत निर्वाचन आयोग के लिए उचित संस्थागत प्रक्रियाएं तक स्थापित नहीं कीं।’’

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