टाकी पालिका में 22 करोड़ से अधिक वित्तीय अनियमितता की सीआईडी ने शुरू की जांच

हाई कोर्ट के निर्देश पर विशेष जांच दल ने दस्तावेज जुटाने शुरू किए,दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश
Taki Municipality Financial Irregularity: CID Probes Over ₹22 Crore Scam Following High Court Order
सांकेतिक फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बशीरहाट : उत्तर 24 परगना जिले की टाकी नगरपालिका में 22 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) नगरपालिका पहुंची और विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक दस्तावेज जुटाए। अदालत ने मामले की जांच की निगरानी करते हुए सीआईडी को आगामी दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच के शुरुआती चरण में नगरपालिका के रजिस्टर, चेकबुक, बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स (बीओसी) की बैठकों से संबंधित आमंत्रण पत्र और प्रस्तावों की पड़ताल की जाएगी। यह भी जांच होगी कि फैसले नगरपालिका कानून के प्रावधानों के अनुसार लिए गए थे या नहीं। प्रस्तावों में काट-छांट, व्हाइटनर के इस्तेमाल, बैठक के एजेंडे और पारित प्रस्तावों के बीच कथित विसंगतियों की भी जांच की जाएगी। कैशबुक के पन्नों में बदलाव के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

पूर्व तृणमूल पार्षद प्रद्युत दास ने दायर की थी जनहित याचिका

इसके अलावा प्रोफाइल के नाम पर कथित तौर पर 98 हजार रुपये के बार-बार बिल बनाने, श्मशान घाट में पीवीसी ब्लॉक लगाने के लिए 1.30 करोड़ रुपये के कार्य और लेखाकार शुभ्र कुमार दास की भूमिका से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा सकती है। एक सरकारी कर्मचारी द्वारा नगरपालिका में वाहन किराये पर चलाने के आरोप की भी जांच की बात सामने आई है। पूजा से पहले हाई कोर्ट ने इस मामले में सीआईडी जांच का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय के खंडपीठ ने अधिवक्ता तिलक मित्र को अदालत मित्र नियुक्त किया है। टाकी नगरपालिका में वर्ष 2018 से 2022 के बीच कथित वित्तीय अनियमितताओं और बोर्ड संचालन में गड़बड़ियों को लेकर पूर्व तृणमूल पार्षद प्रद्युत दास ने जनहित याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन सोमनाथ मुखर्जी और नगरपालिका बोर्ड के खिलाफ शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को भी लिखित शिकायत दी थी। प्रद्युत दास ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बाद उन्हें धमकियां और जान से मारने की चेतावनी भी मिली थी। अब मामले की जांच सीआईडी करेगा।

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