उत्तराखंड से भाजपा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरा

भाजपा का क्षेत्रीयता और जातिवादी राजनीतिक समीकरण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में दिनेश आर्य राज्यसभा सदस्यता के लिए नामांकन पर्चा दाखिल करते हुए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में दिनेश आर्य राज्यसभा सदस्यता के लिए नामांकन पर्चा दाखिल करते हुए
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देहरादून : उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के वास्ते भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार दिनेश आर्य ने मंगलवार को नामांकन भर दिया। भाजपा के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि आर्य ने राज्य विधानसभा में सचिव को अपना नामांकन पत्र सौंपा। नामांकन पत्र भरने का मंगलवार को आखिरी दिन है। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, धामी मंत्रिमंडल के कई मंत्री और सत्ताधारी दल के अनेक विधायक मौजूद थे। फिलहाल यह सीट भाजपा के नरेश बंसल के पास है जिनका छह साल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

विधानसभा में सत्ताधारी भाजपा के संख्या बल को देखते हुए इस बार भी यह सीट उसी के खाते में जाना तय है। राज्य विधानसभा में भाजपा 70 में से 47 सीटों पर काबिज है। सदन में कांग्रेस के 20 सदस्य हैं जबकि एक सीट बहुजन समाज पार्टी तथा दो अन्य सीटें निर्दलीयों के पास हैं। नैनीताल जिले के हल्द्वानी से संबंध रखने वाले दिनेश आर्य भाजपा से लंबे समय से जुड़े हैं और मुख्यमंत्री धामी के करीबी माने जाते हैं। अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत उन्होंने वर्ष 1985 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की और उसके बाद वे भाजयुमो से जुड़ गए। वर्ष 2007-10 तक वह नैनीताल के जिला अध्यक्ष रहे और बाद में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में उन्हें राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया। वर्तमान में दिनेश आर्य को राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त है और वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं। पिछले 2 विधानसभा चुनाव से वे अपने लिए टिकट की दावेदारी करते रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय दिनेश आर्य को राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है। प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें हैं और फिलहाल तीनों पर ही गढ़वाल क्षेत्र के नेताओं का प्रतिनिधित्व है। बंसल की खाली हो रही सीट से कुमाउं के नेता को उच्च सदन भेजने के निर्णय को इसी द्रष्टि से देखा जा रहा है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अनुसूचित जाति के नेता को उम्मीदवार बनाए जाने को हल्द्वानी में 'शुद्धीकरण' मामले में भाजपा को कांग्रेस द्वारा 'दलित विरोधी' के रूप में पेश किए जाने की काट भी माना जा रहा है। अगस्त में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद उस स्थान पर किए गए 'शुद्धीकरण हवन' को लेकर कांग्रेस भाजपा पर लगातार हमलावर है।

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