सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने वाली माया राजेश्वरन बोलीं- वह हमेशा मेरी आदर्श रहेंगी

17 साल की भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने डब्ल्यू35 लागोस में जीता पहला पेशेवर एकल खिताब, युगल मुकाबले में भी बनीं चैंपियन
सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने वाली माया राजेश्वरन बोलीं- वह हमेशा मेरी आदर्श रहेंगी
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भारतीय टेनिस को एक नई उम्मीद मिली है। महज 17 साल की माया राजेश्वरन रेवती ने डब्ल्यू35 लागोस टूर्नामेंट में अपना पहला पेशेवर एकल खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। हालांकि, माया के लिए यह सिर्फ एक खिताब की जीत नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी के नक्शेकदम पर आगे बढ़ने का मौका है, जिसे वह बचपन से अपना आदर्श मानती आई हैं।

माया ने खिताबी मुकाबले में स्पेन की सेलिया सेर्विनो रुइज को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराया। इस जीत के साथ वह डब्ल्यू35 स्तर का एकल खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। इससे पहले यह रिकॉर्ड सानिया मिर्जा के नाम था, जिन्होंने 2004 में 17 साल और 10 महीने की उम्र में लागोस में खिताब जीता था। माया ने 17 साल और तीन महीने की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की।

'सानिया हमेशा मेरी आदर्श रहेंगी'

रिकॉर्ड तोड़ने के बाद सानिया से अपनी तुलना पर माया ने विनम्रता से कहा कि सानिया जैसी दिग्गज खिलाड़ी को पीछे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। उनके मुताबिक, सानिया हमेशा एक दिग्गज रहेंगी और वह खुद भी उनसे प्रेरणा लेती हैं।

माया ने कहा कि सानिया ने भारत में टेनिस को पहचान दिलाने और इस खेल को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि वह सानिया के साक्षात्कार और पॉडकास्ट सुनती हैं और उनसे सीधे बातचीत कर उनके अनुभवों से सीखना चाहती हैं।

माया के लिए सानिया का रिकॉर्ड तोड़ना एक ऐतिहासिक उपलब्धि जरूर है, लेकिन वह इसे दोनों खिलाड़ियों के बीच तुलना के रूप में नहीं देखतीं। उनके लिए सानिया वह प्रेरणा हैं, जिन्होंने देश की युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने का हौसला दिया।

पहले दौर में पिछड़कर की शानदार वापसी

माया का लागोस में सफर आसान नहीं था। उन्होंने क्वालीफाइंग मुकाबलों से मुख्य ड्रॉ में जगह बनाई और पहले दौर में शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी जस्टिना मिकुल्स्काइटे को हराकर सबका ध्यान खींचा। मुकाबले के शुरुआती सेट में वह 0-5 से पिछड़ गई थीं, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए सेट 7-5 से जीता और फिर दूसरा सेट 6-1 से अपने नाम किया।

इसके बाद उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए खिताब तक का सफर तय किया। मुख्य ड्रॉ में उन्होंने एक भी सेट नहीं गंवाया। एकल खिताब के साथ माया ने यूक्रेन की येलिजावेता कोटलियार के साथ युगल खिताब भी जीता।

पेशेवर टेनिस में अभी लंबा सफर बाकी

इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद माया इसे अपने पेशेवर करियर की शुरुआत मानती हैं। उनका कहना है कि इस जीत ने उन्हें खुद पर भरोसा करने और बेहतर खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास दिया है।

फ्रांस के एलीट टेनिस सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाली माया अब अधिक पेशेवर टूर्नामेंट खेलना चाहती हैं। उनका ध्यान अपनी तकनीक, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती को बेहतर बनाने पर है। वह जूनियर ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं के साथ पेशेवर मुकाबलों में भी हिस्सा लेने की योजना बना रही हैं।

माया का मानना है कि टेनिस में हर खिलाड़ी के पास सुधार की गुंजाइश रहती है। इसलिए वह किसी एक खिताब को अंतिम मंजिल मानने के बजाय लगातार सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने पर ध्यान देना चाहती हैं। सानिया के रिकॉर्ड से आगे निकलने के बाद अब उनकी नजर अपने खेल को अगले स्तर तक ले जाने पर है।

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