गहलोत का आरोप : जाति जनगणना का मौजूदा प्रारूप त्रुटिपूर्ण

गहलोत ने ओबीसी, ईबीसी और वंचित वर्गों के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया
अशोक गहलोत
अशोक गहलोत
Published on: 

अहमदाबाद : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने शनिवार को कहा कि जाति जनगणना का मौजूदा प्रारूप ‘बुनियादी तौर पर त्रुटिपूर्ण’ है और आरोप लगाया कि इस कवायद को लेकर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीयत साफ नहीं है।

गहलोत ने कहा कि ‘त्रुटिपूर्ण’ जाति जनगणना से सबसे अधिक नुकसान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और वंचित वर्गों को होगा।0

राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत ने मांग की कि जाति जनगणना की मौजूदा प्रश्नावली को रद्द किया जाना चाहिए और तेलंगाना तथा बिहार में अपनाई गई पद्धति के आधार पर सत्यापित जातियों की सूची के साथ नयी प्रश्नावली तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ऐसी प्रश्नावली राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही तैयार की जानी चाहिए, ताकि प्रत्येक जाति और समुदाय की वास्तविक आबादी के आंकड़े सामने आ सकें। इससे जाति जनगणना सटीक, सार्थक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में प्रभावी बन सकेगी। गहलोत ने कहा कि देशभर में जाति जनगणना पारदर्शी तरीके से कराई जानी चाहिए।

अशोक गहलोत
जिला प्रमुख के पद बढ़े पर OBC सीटें क्यों नहीं ? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

गहलोत ने कहा कि 2023 और 2024 के चुनावों के दौरान जब कांग्रेस ने जाति जनगणना की मांग उठाई थी, तब प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में इस विचार को खारिज करते हुए इसे ‘शहरी नक्सल’ सोच करार दिया था। उन्होंने कहा कि हालांकि, राहुल गांधी की लगातार जाति जनगणना की मांग के बाद अंततः प्रधानमंत्री ने अपना रुख बदल लिया।

कांग्रेस नेता ने कहा, घोषणा कर दी गई है, लेकिन मोदी सरकार की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से लागू करने की मंशा नजर नहीं आती। जाति जनगणना अभी केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में शुरू हुई है और फरवरी 2027 से इसे पूरे देश में लागू किया जाना है, ऐसे में मोदी सरकार के पास ढांचे में जरूरी सुधार करने का अभी भी समय है।

उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 सवालों में से केवल 10वां सवाल ही यह स्पष्ट कर देता है कि मोदी सरकार उचित जाति जनगणना कराने से बच रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस सवाल के लिए सरकार ने खुला प्रारूप अपनाया है, जबकि इसमें सत्यापन सूची का इस्तेमाल करना जरूरी था।

इस तरह की सूची में आमतौर पर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त जातियों की पहले से तय सूची होती है। इसमें गणनाकर्मी नागरिक से उसकी जाति पूछकर सूची में मौजूद संबंधित विकल्प का चयन करता है।

अशोक गहलोत
जूली बोले- नगर निकाय चुनाव में हार की आशंका से बौखलाई भाजपा
सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in