अंजलि ज्वेलर्स की नई फिल्म में दिखा माँ-बेटे का अटूट रिश्ता, दुर्गा पूजा पर घर वापसी की भावुक कहानी

माँ के त्याग और बेटे के प्यार को सोने की झुमकियों के तोहफ़े के ज़रिए किया गया पेश
अंजलि ज्वेलर्स की नई फिल्म में दिखा माँ-बेटे का अटूट रिश्ता, दुर्गा पूजा पर घर वापसी की भावुक कहानी
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कोलकाता: दुर्गा पूजा बंगाल में केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि घर वापसी, पारिवारिक रिश्तों और भावनाओं से जुड़ा उत्सव है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए अंजलि ज्वेलर्स ने एक नई ब्रांड फिल्म पेश की है। यह फिल्म माँ-बेटे के अटूट रिश्ते, माँ के निस्वार्थ प्रेम और जीवनभर के त्याग को भावुक अंदाज़ में दर्शाती है।

फिल्म की कहानी एक ऐसी माँ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेटे की परवरिश के दौरान अपनी खुशियों और इच्छाओं से पहले उसकी ज़रूरतों को रखती है। समय के साथ बेटा बड़ा होकर अपनी दुनिया में आगे बढ़ जाता है, लेकिन दुर्गा पूजा का अवसर उसे घर और माँ के पास वापस ले आता है। इस बार वह अपनी माँ के लिए सोने की खूबसूरत झुमकियों की एक जोड़ी लेकर लौटता है। यह तोहफ़ा उसके लिए महज़ एक आभूषण नहीं, बल्कि माँ के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है।

फिल्म में माँ के प्रेम और माँ दुर्गा के दिव्य मातृत्व के बीच एक भावनात्मक समानता भी दिखाई गई है। इसके ज़रिए यह संदेश दिया गया है कि दुर्गा पूजा देवी के आगमन का उत्सव होने के साथ-साथ उन महिलाओं के प्रति आभार जताने का अवसर भी है, जिनका प्रेम, त्याग और शक्ति परिवारों को संवारते हैं।

रोजा पारोमिता डे के निर्देशन में बनी यह फिल्म उनके निर्देशन करियर की पहली फिल्म है। इसकी कहानी एक ऐसी भावना को सामने लाती है, जिससे कई परिवार जुड़ाव महसूस कर सकते हैं—इंसान जीवन में चाहे कितनी भी दूर चला जाए, अपनों का प्रेम उसे घर लौटने का रास्ता दिखा ही देता है।

फिल्म के बारे में अंजलि ज्वेलर्स के पार्टनर अन्नार्घा उत्तिया चौधरी ने कहा कि ब्रांड के लिए आभूषण केवल सोने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भावनाओं, यादों और रिश्तों से जुड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्गा पूजा ऐसा अवसर है, जब लोग अपनी जड़ों की ओर लौटते हैं और अपने प्रियजनों के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। इस फिल्म के माध्यम से ब्रांड माँ के निस्वार्थ प्रेम और उनके अनगिनत त्यागों को सम्मान देना चाहता है।

फिल्म का समापन बंगाली पंक्ति ‘अंजलि छोड़ा पूजा होय ना’ से होता है, जिसका भावार्थ है—‘अंजलि ज्वेलर्स के बिना दुर्गा पूजा अधूरी है।’ यह पंक्ति बंगाल की दुर्गा पूजा परंपराओं और पारिवारिक उत्सवों का हिस्सा बनने की ब्रांड की आकांक्षा को दर्शाती है।

इस तरह अंजलि ज्वेलर्स की यह फिल्म आभूषणों की सुंदरता से आगे बढ़कर उन भावनाओं को सामने लाती है, जो किसी तोहफ़े को खास बनाती हैं। माँ के प्रति प्रेम, उनके त्याग के लिए कृतज्ञता और घर लौटने की खुशी—यही इस कहानी का मूल संदेश है।

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