

उखरुल : मणिपुर के उखरुल जिले में नागा संगठनों ने राज्य में जारी राजनीतिक संकट के समाधान, नागा समुदाय के खिलाफ कथित ‘छद्म युद्ध’ (प्रॉक्सी वॉर) खत्म करने और नागा बहुल क्षेत्रों से असम राइफल्स को हटाने की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली। यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। रैली का आयोजन तांगखुल नागा लॉन्ग (टीएनएल) और तांगखुल फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से किया गया। उखरुल जिले के विभिन्न इलाकों से आए प्रदर्शनकारी डुंगरेई जंक्शन और मिशन ग्राउंड में एकत्र हुए। वहां से जुलूस की शक्ल में उखरुल मुख्यालय ग्राउंड पहुंचे, जहां जनसभा हुई। प्रदर्शन के दौरान दुकानें, निजी संस्थान और सार्वजनिक परिवहन बंद रहे, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। इसी तरह का प्रदर्शन पड़ोसी कामजोंग जिले में भी किया गया।
असम राइफल्स हटाने और एसओओ समझौता रद्द करने की मांग :
प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न मांगों वाले प्लेकार्ड थे। इनमें नागा बहुल इलाकों से असम राइफल्स को हटाने, कुकी उग्रवादी संगठनों को कथित रूप से हथियार दिए जाने पर रोक लगाने और सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौता रद्द करने की मांग प्रमुख थी। इसके अलावा कुकी उग्रवादी संगठनों को आतंकवादी समूह घोषित करने, कुकी शरणार्थियों की वापसी और कथित अवैध कुकी प्रवासियों को वापस भेजने की मांग भी उठाई गई। कुछ प्लेकार्ड में नेमचा किपजेन को उपमुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की गई थी। सभा को संबोधित करते हुए तांगखुल कतमनाओ सकलोंग (टीकेएस) के अध्यक्ष रामरेइचन केइशिंग ने कहा कि रैली की तीन प्रमुख मांगें हैं—मणिपुर संकट का राजनीतिक समाधान, नागा समुदाय के खिलाफ कथित छद्म युद्ध का अंत और नागा बहुल क्षेत्रों से असम राइफल्स की वापसी।
केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप :
केइशिंग ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के संरक्षण में एसओओ समझौते के तहत सक्रिय कुकी संगठन नागा समुदाय के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियां चला रहे हैं। उन्होंने इसे ‘प्रॉक्सी वॉर’ बताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने असम राइफल्स पर भी पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि संघर्ष के दौरान यह बल निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल रहा है। उनके मुताबिक, यदि असम राइफल्स नागाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो नागा बहुल क्षेत्रों में उसकी तैनाती का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन :
रैली के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित ज्ञापन जिला आयुक्त के माध्यम से सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से मणिपुर संकट को ऐतिहासिक समस्या के रूप में देखने और स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने की मांग की गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुकी समुदाय के कथित अवैध प्रवास और पहाड़ी तथा घाटी क्षेत्रों के बीच असमानताओं ने संकट को बढ़ाया है। इसमें मौजूदा ढांचागत असंतुलन दूर करने पर जोर दिया गया है। ज्ञापन के अनुसार, संकट शुरू होने के बाद से हिंसक घटनाओं में 32 नागा नागरिकों की मौत हुई है। इसमें पहाड़ी क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि 1881 की जनगणना में मणिपुर में कुकी गांवों की संख्या करीब 73 थी, जो अब बढ़कर 1,878 हो गई है। इसमें इस बदलाव के लिए पड़ोसी बर्मा से कुकी लोगों के कथित अवैध आगमन और शरणार्थियों से जुड़ी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। दस सूत्रीय ज्ञापन में राजनीतिक समाधान, नागा समुदाय के खिलाफ कथित शत्रुता समाप्त करने और नागा बहुल क्षेत्रों से असम राइफल्स हटाने सहित विभिन्न मांगें रखी गई हैं।