जेफ्री आर्चर कौन थे: किताबों, राजनीति और विवादों से भरी कहानी

‘Kane and Abel’ से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले ब्रिटिश लेखक ने 300 मिलियन से ज्यादा किताबें बेचीं, 50 साल के करियर में लिखीं 31 उपन्यास
जेफ्री आर्चर ने पांच दशक के लेखकीय करियर में 300 मिलियन से अधिक किताबें बेचीं।
जेफ्री आर्चर ने पांच दशक के लेखकीय करियर में 300 मिलियन से अधिक किताबें बेचीं।
Published on: 

कुछ लेखक पुरस्कारों से पहचाने जाते हैं, कुछ आलोचकों की प्रशंसा से और कुछ ऐसे होते हैं जिनकी पहचान उनके पाठकों की संख्या बन जाती है। जेफ्री आर्चर इसी तीसरी श्रेणी के लेखक थे। ब्रिटिश लेखक, पूर्व सांसद और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रहे आर्चर ने पांच दशक के लेखन करियर में दुनिया भर में 300 मिलियन से अधिक किताबें बेचीं। उनके उपन्यास 100 से ज्यादा देशों और दर्जनों भाषाओं में पहुंचे। 5 अक्टूबर 2026 को 86 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ एक ऐसा लेखकीय सफर खत्म हुआ, जिसने लोकप्रिय कथा साहित्य में अपनी अलग जगह बनाई।

उनका निधन भी उनके लेखकीय जीवन के अनुरूप ही हुआ। उनकी मृत्यु के समय वह अपने अंतिम उपन्यास पर काम कर रहे थे। उनकी आखिरी किताब ‘Adam & Eve’ उनके निधन के अगले दिन, 6 अक्टूबर को प्रकाशित हुई। यह उनके 50 साल के उपन्यास लेखन का 31वां और अंतिम उपन्यास था।

एक सांसद से लेखक बनने तक की कहानी

जेफ्री हॉवर्ड आर्चर का जन्म 15 अप्रैल 1940 को लंदन में हुआ था। उनका परिवार बाद में समरसेट के Weston-super-Mare चला गया, जहां उनका बचपन बीता। उन्होंने Wellington School में पढ़ाई की और बाद में Oxford से जुड़े Brasenose College में शिक्षा ली। पढ़ाई के दौरान वह एथलेटिक्स में भी सक्रिय रहे और Oxford University Athletic Club के अध्यक्ष बने। उन्होंने ब्रिटेन के लिए भी दौड़ लगाई थी।

लेखन में आने से पहले आर्चर राजनीति में सक्रिय हुए। 1969 में वह Louth से Conservative सांसद चुने गए और 1974 तक हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य रहे। बाद में वह Conservative Party के उपाध्यक्ष भी बने। 1992 में उन्हें Life Peer बनाया गया और वह House of Lords पहुंचे। वह 2024 तक हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रहे।

लेकिन राजनीति में उनका सफर विवादों से अछूता नहीं रहा। एक निवेश में भारी नुकसान के बाद वह गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए। इसी दौर में उन्होंने अपनी पहली किताब लिखने का फैसला किया। ‘Not a Penny More, Not a Penny Less’ 1976 में प्रकाशित हुई। यह किताब शुरुआत में बहुत बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं थी और पहले साल इसकी करीब 3,000 प्रतियां ही बिकीं।

लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।

‘Kane and Abel’ ने बदल दी किस्मत

1979 में प्रकाशित ‘Kane and Abel’ जेफ्री आर्चर की सबसे बड़ी पहचान बन गया। दो अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आए लोगों की जिंदगी, महत्वाकांक्षा, संघर्ष और आपसी प्रतिद्वंद्विता की कहानी ने दुनिया भर के पाठकों को आकर्षित किया। किताब ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर लेखक बना दिया। आर्चर के अनुसार, किताब ने पहले ही सप्ताह करीब 10 लाख प्रतियां बेची थीं। बाद के वर्षों में इसकी बिक्री करोड़ों तक पहुंच गई और यह आज भी उनकी सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली किताबों में शामिल है। भारत में भी ‘Kane and Abel’ ने आर्चर को जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। उनकी किताबें भारतीय पाठकों की कई पीढ़ियों तक पहुंचीं। 2019 में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग पहुंचे थे।

यही वजह है कि भारत में आर्चर की लोकप्रियता को सिर्फ एक विदेशी लेखक की सफलता के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कई भारतीय अंग्रेजी पाठकों के लिए उनकी किताबें शुरुआती लोकप्रिय उपन्यासों में शामिल रहीं। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर पहली बार अंग्रेजी उपन्यास पढ़ने वाले ने आर्चर से शुरुआत की, लेकिन उनके लंबे समय तक बने पाठक वर्ग ने उन्हें भारतीय अंग्रेजी-पुस्तक संस्कृति में खास जगह जरूर दी।

कौन-कौन सी किताबें रहीं खास?

‘Kane and Abel’ के अलावा आर्चर ने कई ऐसी किताबें लिखीं जो अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर बनीं।

‘Not a Penny More, Not a Penny Less’ उनकी पहली किताब थी। इसमें ठगे गए चार लोगों की उस व्यक्ति से बदला लेने की कहानी है जिसने उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद किया था।

‘First Among Equals’ में चार ब्रिटिश सांसदों की कहानी के जरिए सत्ता और प्रधानमंत्री बनने की दौड़ को दिखाया गया। आर्चर के राजनीतिक अनुभव ने इस किताब को खास आधार दिया। बाद में इसका टेलीविजन रूपांतरण भी हुआ।

‘As the Crow Flies’, ‘A Matter of Honour’, ‘Honour Among Thieves’, ‘The Fourth Estate’ और ‘The Eleventh Commandment’ भी उनकी चर्चित किताबों में शामिल हैं।

2008 में आई ‘A Prisoner of Birth’ ने भी बड़ी सफलता हासिल की। यह ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और भारत में नंबर एक बेस्टसेलर बनी और अमेरिका की प्रतिष्ठित बेस्टसेलर सूची में भी जगह बनाई।

2009 की ‘Paths of Glory’ में उन्होंने 1924 में एवरेस्ट पर चढ़ने के प्रयास से जुड़े George Mallory की कहानी को आधार बनाया।

इसके बाद आर्चर ने सात किताबों वाली ‘Clifton Chronicles’ लिखी। 2011 में ‘Only Time Will Tell’ से शुरू हुई यह श्रृंखला एक परिवार की कई पीढ़ियों के जरिए प्रेम, महत्वाकांक्षा, राजनीति, कारोबार और संघर्ष की कहानी बताती है। श्रृंखला की कई किताबें ब्रिटेन, भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में नंबर एक बेस्टसेलर बनीं।

पुरस्कारों के मामले में कहां खड़े थे आर्चर?

जेफ्री आर्चर की उपलब्धियों को समझने के लिए एक बात महत्वपूर्ण है—वह पुरस्कारों से ज्यादा बिक्री और पाठकीय लोकप्रियता के लेखक थे। 2014 में उन्हें International Recognition Award मिला। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लेखकीय योगदान और व्यापक पाठकीय पहुंच को मान्यता देता है। उनकी किताबों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। ‘Paths of Glory’ को Prix Relay du Roman d ’Evasion मिला, जबकि ‘A Prisoner of Birth’ को Prix Polar International में सम्मानित किया गया।

हालांकि उन्हें Nobel Prize, Booker Prize या इसी स्तर का कोई प्रमुख साहित्यिक पुरस्कार नहीं मिला। इसलिए उनकी उपलब्धियों को पुरस्कारों की संख्या के आधार पर मापना सही नहीं होगा। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी असाधारण पाठकीय पहुंच रही। वह ऐसे लेखकों में शामिल रहे जिनकी किताबें कई दशकों तक बेस्टसेलर सूचियों में बनी रहीं। उनकी किताबों की दुनिया भर में 300 मिलियन से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।

राजनीति, जेल और ‘A Prison Diary’

आर्चर की कहानी सिर्फ किताबों की नहीं थी। उनका राजनीतिक जीवन 1990 के दशक के अंत में गंभीर विवादों में घिर गया।

1987 में उन्होंने एक अखबार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा जीता था। बाद में सामने आया कि उन्होंने उस मामले में झूठ बोला और झूठा अलिबी तैयार किया था।

2001 में उन्हें झूठी गवाही देने और न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए चार साल की सजा सुनाई गई। उन्होंने करीब दो साल जेल में बिताए और 2003 में रिहा हुए।

जेल के अनुभव को उन्होंने तीन हिस्सों वाली ‘A Prison Diary’ में दर्ज किया—‘Hell’, ‘Purgatory’ और ‘Heaven’। इन किताबों ने उनके जीवन के सबसे विवादित दौर को संस्मरण के रूप में दर्ज किया।

दिलचस्प बात यह रही कि इस विवाद के बाद भी उनकी किताबों की लोकप्रियता खत्म नहीं हुई। वह लिखते रहे, नए बेस्टसेलर देते रहे और नए पाठक जोड़ते रहे।

आर्चर की सबसे बड़ी विरासत क्या है?

जेफ्री आर्चर को साहित्यिक इतिहास में शायद उस लेखक के रूप में याद नहीं किया जाएगा जिसने कथा लेखन की भाषा या शैली को पूरी तरह बदल दिया। उनकी किताबों को लेकर साहित्यिक आलोचना भी हुई। लेकिन लोकप्रिय कथा साहित्य में उनकी एक खास ताकत थी—कहानी को इस तरह आगे बढ़ाना कि पाठक अगला पन्ना पलटता रहे। उनकी कहानियों में महत्वाकांक्षा, परिवार, पैसा, सत्ता, प्रेम, बदला, किस्मत और अचानक आने वाले मोड़ बार-बार दिखाई देते हैं। यही घटनाप्रधान शैली उन्हें लाखों पाठकों तक ले गई।

भारत में उनकी लोकप्रियता उनकी विरासत का खास हिस्सा है। उनकी कई किताबें यहां लंबे समय तक बेस्टसेलर रहीं और उनके उपन्यासों में भारत भी धीरे-धीरे दिखाई देने लगा। ‘Cometh the Hour’ में भारतीय किरदार और मुंबई कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई भारतीय पाठकों के लिए आर्चर की किताबें सिर्फ पढ़ने के लिए खरीदी गई किताबें नहीं थीं। उनकी किताबों के साथ पढ़ने की एक आदत, एक खास दौर और अंग्रेजी लोकप्रिय साहित्य से जुड़ने की याद भी जुड़ी रही। यह अनुभव हर पाठक का नहीं था, लेकिन उनकी कई पीढ़ियों तक बनी लोकप्रियता इस बात की ओर जरूर इशारा करती है कि उन्होंने भारत में एक स्थायी पाठक वर्ग तैयार किया।

5 अक्टूबर 2026 को जब उनका निधन हुआ, तब उनकी अंतिम किताब ‘Adam & Eve’ दुनिया के सामने आने वाली थी। पांच दशक पहले करीब 3,000 प्रतियां बेचने वाली पहली किताब से शुरू हुआ सफर 300 मिलियन से ज्यादा प्रतियों की वैश्विक बिक्री तक पहुंच चुका था। जेफ्री आर्चर की कहानी इसलिए असाधारण है क्योंकि इसमें सफलता और विवाद दोनों साथ चलते हैं। राजनीति में उतार-चढ़ाव आया, जेल जाना पड़ा, आलोचना हुई, लेकिन पाठकों के साथ उनका रिश्ता बना रहा। उनकी सबसे बड़ी विरासत शायद यही है—एक ऐसा लेखक जिसकी किताबों ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अगला पन्ना पलटने के लिए मजबूर किया।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in