

ढाका : बांग्लादेश में 2024 में बड़े पैमाने पर हुए जनविद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल की गईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह अगले महीने (भारत में) निर्वासन से स्वदेश वापसी के अपने इरादे पर कायम हैं। हसीना ने यह बात ऐसे समय कही है, जब उनकी सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई घातक कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों के कारण सत्ता से हटाए जाने के बाद हसीना भारत आ गई थीं और तब से वह वहीं रह रही हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2025 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि वह उस कार्रवाई का आदेश देने के लिए जिम्मेदार थीं जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों अन्य घायल हो गए। उन्होंने न्यायाधिकरण के फैसले को भी खारिज कर दिया है और इस मुकदमे की वैधता को चुनौती दी है। बांग्लादेश ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया है। ईमेल के जरिए पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘‘अगर मेरी किस्मत में मौत लिखी है तो मैं अपने ही देश की मिट्टी पर अपने ही लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी।’’ इसलिए मैं बांग्लादेश वापस आऊंगी। मेरा यह फैसला नहीं बदला है।