

समरकंद : भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि न्याय को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय स्वरूप की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उज्बेकिस्तान के समरकंद में एशियाई संवैधानिक न्यायालयों एवं समकक्ष संस्थानों के संघ (एएसीसी) की सातवीं कांग्रेस के उद्घाटन सत्र और पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि यह सम्मेलन एशियाई संवैधानिक अदालतों को अपने अनुभव साझा करने और तकनीक के साझा भविष्य के अनुरूप सिद्धांत विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के डिजिटलीकरण से अदालतों तक पहुंच आसान होगी, मामलों के निपटारे में देरी कम होगी और प्रक्रियाएं सरल बनेंगी। एआई न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को शोध करने तथा बड़ी मात्रा में सूचनाओं के प्रबंधन में सहायता कर सकती है। सीजेआई ने जोर दिया कि संवैधानिक अदालतों को गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर कायम रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौती परंपरा और तकनीक में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि संविधान को मार्गदर्शक बनाकर न्यायिक संस्थानों में तकनीक का सर्वोत्तम उपयोग करने की है।