

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति के बीच RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के बीच किए गए PTI के सर्वेक्षण में 16 में से अधिकांश प्रतिभागियों ने दर बढ़ने की संभावना जताई है।
रेपो दर बढ़ने पर यह 2025 में शुरू हुए कटौती चक्र के बाद मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव होगा। RBI ने फरवरी 2023 में आखिरी बार दर 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.50 फीसदी की थी। फिलहाल रेपो दर 5.25 फीसदी है। यूनियन बैंक की मुख्य आर्थिक सलाहकार कनिका पसरीचा के मुताबिक, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की दर वृद्धि, बढ़ते मुद्रास्फीति जोखिम और मजबूत आर्थिक वृद्धि RBI को दर बढ़ाने की गुंजाइश देते हैं।
क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट दोबारा गहराने से ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों पर दबाव बढ़ा है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी पर पहुंच गई, जो आठ महीने का उच्च स्तर है और RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही।
विशेषज्ञों को FY27 के दौरान दो से तीन दर बढ़ोतरी की उम्मीद है। ICRA की अदिति नायर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से पेट्रोल-डीजल महंगे होने और व्यापक महंगाई दबाव बढ़ने की आशंका है।
हालांकि, L&T के मुख्य अर्थशास्त्री सच्चिदानंद शुक्ला का मानना है कि RBI इस बार भी दरों में बदलाव न कर स्थिति का इंतजार कर सकता है, क्योंकि फिलहाल मांग आधारित महंगाई या अर्थव्यवस्था के अत्यधिक गर्म होने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं।