

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कमजोर मानसून, अल नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव को निकट अवधि में महंगाई के प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य वर्ग में कई वस्तुओं की कीमतों में दबाव बढ़ रहा है और महंगाई के व्यापक होने के शुरुआती संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.8 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 4.5 प्रतिशत से अधिक है।
RBI के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रह सकती है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए यह अनुमान 5.6 प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष में मुख्य महंगाई 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मल्होत्रा ने कहा कि खाद्य महंगाई का दबाव अब अधिक व्यापक हो गया है। चीनी और प्याज जैसी कुछ वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। अगस्त में ईंधन महंगाई भी बढ़ी, जिसका एक कारण प्रतिकूल आधार प्रभाव रहा।
महंगाई के जोखिम को देखते हुए MPC ने रेपो दर भी 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी है। समिति ने अपना रुख ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘जरूरत के अनुसार सख्त’ कर दिया। RBI का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई और उसका परिदृश्य पिछले वर्ष की तुलना में कम अनुकूल है।