एक्सचेंजों की सेल्फ-लिस्टिंग पर फिर विचार करे भारत : NSE चेयरमैन

सेल्फ-लिस्टिंग के नियम में बदलाव का मुद्दा बाजार ढांचे और नियामकीय निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक्सचेंजों की सेल्फ-लिस्टिंग पर फिर विचार करे भारत : NSE चेयरमैन
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नई दिल्ली : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के चेयरमैन श्रीनिवास इंजीती ने कहा है कि भारत को शेयर बाजारों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की अनुमति देने के नियम पर फिर विचार करना चाहिए। उनका यह बयान NSE के प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज बीएसई पर करीब 47 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर सूचीबद्ध होने के एक दिन बाद आया है।

भारत में फिलहाल एक्सचेंजों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की अनुमति नहीं है। इसके पीछे संभावित हितों के टकराव से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण हैं। हालांकि, दुनिया के कई बड़े बाजारों में सेल्फ-लिस्टिंग की अनुमति है। अमेरिका में इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE), जो न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) का संचालन करता है, खुद NYSE पर सूचीबद्ध है।

NSE भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख भूमिका रखता है। एक्सचेंज के पास देश के कैश मार्केट कारोबार का करीब 93 प्रतिशत और ऑप्शंस कारोबार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में सेल्फ-लिस्टिंग के नियम में बदलाव का मुद्दा बाजार ढांचे और नियामकीय निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बीच, NSE के मुख्य कारोबार अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को बुलियन कॉन्ट्रैक्ट्स में कारोबार की अनुमति मिलने से एक्सचेंज के कमोडिटी कारोबार को विस्तार मिल सकता है।

भारत ने गुरुवार को FPI को भौतिक रूप से निपटाए जाने वाले गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भाग लेने की अनुमति दी। इससे बुलियन कॉन्ट्रैक्ट्स में निवेशकों का आधार बढ़ने और कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। कृष्णन के मुताबिक, FPI अपने इक्विटी निवेश के लिए पहले से आवंटित पूंजी का इस्तेमाल कमोडिटी डेरिवेटिव्स में कारोबार के लिए कर सकेंगे।

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