

नई दिल्ली : भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 94.53 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में कुल संचयी एफडीआई प्रवाह 843 अरब डॉलर रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ अभियान की 12वीं वर्षगांठ के अवसर पर गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा कि एफडीआई के ये आंकड़े भारत में निवेश और विनिर्माण के लिए बन रहे माहौल की तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता विकसित करने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी काम कर रही है।
मंत्री के अनुसार, देश में उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत 31 मार्च तक 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है। इन योजनाओं के तहत 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन या बिक्री दर्ज की गई, जबकि 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। पीएलआई योजनाओं से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की बात भी उन्होंने कही।
गोयल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार, दवा, चिकित्सा उपकरण, वाहन, आईटी हार्डवेयर और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को पीएलआई योजनाओं से महत्वपूर्ण लाभ मिला है। इन योजनाओं का उद्देश्य देश में उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए जरूरी औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके तहत राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में नए औद्योगिक स्मार्ट शहर स्थापित किए जा रहे हैं।
गोयल के मुताबिक, एफडीआई में वृद्धि और पीएलआई योजनाओं के तहत निवेश, उत्पादन तथा रोजगार के आंकड़े ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किए जा रहे प्रयासों को दर्शाते हैं। सरकार का जोर औद्योगिक क्षमता विस्तार और निवेश के लिए अनुकूल आधार तैयार करने पर है।