मेटा के प्लेटफॉर्म पर एआई से बनाए बाल यौन शोषण वाले 332 विज्ञापन, भारत में 84

रिपोर्ट में खुलासा, अगस्त में ही 274 आपत्तिजनक विज्ञापन प्रसारित; शिकायतों के बावजूद कई विज्ञापनों को मेटा ने नीतियों के अनुरूप बताकर हटाने से किया इनकार
मेटा के प्लेटफॉर्म पर एआई से बनाए बाल यौन शोषण वाले 332 विज्ञापन, भारत में 84
रिपोर्ट के अनुसार, 332 में से 274 विज्ञापन केवल अगस्त में चलाए गए।
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नई दिल्ली : फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पिछले 10 महीनों में एआई से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री वाले 332 पेड विज्ञापन चलाए जाने का दावा किया गया है। इनमें 84 विज्ञापन भारत में थे। वाशिंगटन स्थित गैर-लाभकारी संस्था कैंपेन फॉर अकाउंटेबिलिटी की शोध पहल टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (TTP) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

केवल अगस्त में चले 274 विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, 332 में से 274 विज्ञापन केवल अगस्त में चलाए गए। भारत से जुड़े 84 विज्ञापनों में 78 ऐसे थे, जो सरकार की ओर से मेटा को ऐसी सामग्री हटाने के निर्देश दिए जाने और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रकाशित हुए। दो महीने पहले बीबीसी आई की जांच में भारत में ऐसे पेड विज्ञापनों के चलने का खुलासा हुआ था, जिसके बाद सरकार ने मेटा को इन्हें हटाने का आदेश दिया था।

TTP ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और भारत में ऐसे विज्ञापनों की पहचान की और सभी की रिपोर्ट अमेरिकी संस्था एनसीएमईसी को की। संस्था के मुताबिक, लगभग सभी विज्ञापनों में बच्चों की तस्वीरों को एआई की मदद से अश्लील यौन गतिविधियों में दिखाया गया था। कुछ विज्ञापनों में वास्तविक बच्चों की तस्वीरों के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है।

84 में केवल 55 की ही शिकायत

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के 84 विज्ञापनों में से 55 की शिकायत मेटा के अपने सिस्टम से की जा सकी। इनमें 43 मामलों में कंपनी ने कहा कि विज्ञापन उसकी विज्ञापन नीतियों का उल्लंघन नहीं करता, जबकि 11 विज्ञापनों के पहले ही हटाए जाने की जानकारी दी गई। एक शिकायत का जवाब नहीं मिला।

भारत में बाल यौन शोषण सामग्री का प्रसार अपराध है। एनसीपीसीआर और एनएचआरसी मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भारतीय कानून के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग की मांग की है।

मेटा ने कहा है कि वह बच्चों के शोषण, चाहे वह वास्तविक हो या एआई से तैयार, को बर्दाश्त नहीं करता और ऐसे मामलों की पहचान व कार्रवाई के लिए अपने सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है।

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