

पटना : बिहार में भारी जल प्रवाह के बीच बुधवार को गंडक नदी के तटबंध गोपालगंज और सारण जिलों में दो स्थानों पर टूट गए। वहीं, कई जगहों पर पानी का रिसाव और पाइपिंग होने से बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड में मुख्य दाएं तटबंध के अंदर स्थित बांधौली-शीतलपुर-फैजुल्लाहपुर (बीएसएफ) जमींदारी बांध शीतलपुर गांव के पास बुधवार तड़के करीब छह मीटर की लंबाई में टूट गया।
विभाग ने बताया कि इससे परसौनी, शीतलपुर और पखन गांवों के निचले इलाकों में पानी फैलने तथा संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, सारण का मुख्य तटबंध सुरक्षित है।
बयान के अनुसार, सारण जिले के मेकर प्रखंड के हैजलपुर गांव में गंडक नदी का दायां सारण तटबंध मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात अचानक करीब आठ मीटर तक धंस गया जिससे पानी फैलने लगा। विभाग ने कहा कि हैजलपुर, परमानंद छपरा और नौकराहा गांवों के निचले इलाकों में पानी भरने और संपर्क व्यवस्था बाधित होने का खतरा है।
गंगा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटबंधों पर दबाव और बढ़ गया है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों के लोगों को सतर्क किया है। जल संसाधन विभाग की टीमें गोपालगंज और सारण जिला प्रशासन के साथ मिलकर चौबीसों घंटे बाढ़ से निपटने के उपाय कर रही हैं।
इससे पहले मंगलवार को गंडक नदी के बाएं किनारे स्थित चंपारण तटबंध के दो हिस्से रात में क्षतिग्रस्त हो गए थे। ये घटनाएं बगहा-1 के खैरटवा और बैरिया के फुलियाखाड़ में हुई थीं।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह राज्य के तीन प्रमुख बैराजों से पानी के प्रवाह में मिले-जुले रुझान देखने को मिले। गंडक और सोन नदियों में जल प्रवाह घटा, जबकि कोसी में यह स्थिर रहा।
विभाग के अनुसार, वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से पानी का प्रवाह सुबह चार बजे 1,39,400 क्यूसेक से घटकर सात बजे 1,31,500 क्यूसेक हो गया। इसी अवधि में बीरपुर स्थित कोसी बैराज से जल प्रवाह 1,04,100 क्यूसेक पर स्थिर रहा।
वहीं, इंद्रपुरी सोन बैराज से पानी का प्रवाह सुबह चार बजे 1,59,062 क्यूसेक से घटकर सात बजे 1,19,960 क्यूसेक रह गया।
अधिकारियों ने कहा कि गंडक नदी में अत्यधिक जल प्रवाह और गंगा के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण गंडक नदी के तटबंधों पर भारी दबाव है। कई स्थानों पर पानी का रिसाव हो रहा है, जिसे चौबीसों घंटे चलाए जा रहे बाढ़-रोधी अभियानों के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, राज्यभर में लगातार हो रही बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियों और जलधाराओं में उफान आ गयी है।