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सुजुकी के अगले 10 साल की रणनीति में भारत सबसे अहम, हाइब्रिड से सीबीजी तक कई तकनीकों पर दांव

2030 तक भारत में सालाना 40 लाख वाहन बनाने का लक्ष्य, नई कारों के विकास में लगने वाला समय भी आधा करेगी कंपनी

Tanisha Hirawat

जापान की वाहन कंपनी सुजुकी ने अगले 10 साल के लिए अपनी नई तकनीकी रणनीति पेश की है और इसमें भारत को बड़ी भूमिका दी है। कंपनी भारत को न केवल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है, बल्कि यहां से दुनिया के अलग-अलग बाजारों के लिए वाहनों का निर्यात बढ़ाने की भी तैयारी कर रही है। सुजुकी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 और उसके बाद भारत में सालाना करीब 40 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता हासिल करना है।

सुजुकी की नई रणनीति में किसी एक वाहन तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग बाजारों के हिसाब से कई तरह की तकनीकों पर काम करने की बात कही गई है। कंपनी हाइब्रिड वाहनों के साथ बैटरी से चलने वाले वाहन, आंतरिक दहन इंजन, सीएनजी और कार्बन-न्यूट्रल ईंधन से जुड़ी तकनीकों को भी आगे बढ़ाएगी। भारत के लिए यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां अलग-अलग कीमत और उपयोग वाले वाहनों के साथ ईंधन और चार्जिंग ढांचे की जरूरत भी अलग है।

कंपनी छोटी कारों के लिए नई हाइब्रिड प्रणाली और कॉम्पैक्ट कारों के लिए सीरीज हाइब्रिड तकनीक विकसित कर रही है। इसके अलावा कम बैटरी क्षमता के साथ बाहरी चार्जिंग सुविधा देने वाली तकनीक पर भी काम किया जा रहा है। सुजुकी का जोर ऐसी तकनीक विकसित करने पर है जो अलग-अलग बाजारों की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल की जा सके।

भारत में सीबीजी यानी संपीड़ित जैव गैस को लेकर भी कंपनी की योजना आगे बढ़ रही है। सुजुकी ने भारत में गोबर से बनने वाली जैव गैस के इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर संसाधनों के दोबारा उपयोग की व्यवस्था को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है। भारत में उसकी तीसरी जैव गैस इकाई अगस्त 2026 में शुरू हो चुकी है। कंपनी की भारतीय इकाई खड़खौदा में 10 टन प्रतिदिन क्षमता का जैव गैस संयंत्र भी स्थापित कर रही है और चार सीबीजी परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है।

उत्पादन के साथ कंपनी वाहन बनाने की गति भी बढ़ाना चाहती है। सुजुकी ने 2030 तक नए वाहन के विकास में लगने वाले समय को आधा करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ विकास क्षमता में 30 प्रतिशत और विनिर्माण क्षमता में 50 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य है। कंपनी डिजिटल इंजीनियरिंग और मॉड्यूलर तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएगी, ताकि अलग-अलग वाहनों में समान तकनीक और हिस्सों का इस्तेमाल किया जा सके।

भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की यह योजना सुजुकी के वैश्विक कारोबार में देश की बढ़ती भूमिका को भी दिखाती है। कंपनी के मुताबिक, भारत पहले से ही उसके वैश्विक कारोबार और उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। आने वाले वर्षों में यहां तैयार होने वाले वाहनों को घरेलू बाजार के साथ-साथ दूसरे देशों में भी भेजने पर जोर रहेगा।

सुजुकी की नई रणनीति से साफ है कि आने वाले वर्षों में भारतीय वाहन बाजार में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों पर ही ध्यान नहीं रहेगा। हाइब्रिड, सीएनजी, सीबीजी, इलेक्ट्रिक और दूसरे कम-उत्सर्जन विकल्पों को साथ लेकर चलने वाली रणनीति वाहन कंपनियों के लिए अहम हो सकती है। भारत इस बदलाव में सुजुकी के लिए उत्पादन, तकनीक और निर्यात—तीनों का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।

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