भारतीय वाहन बाजार में मध्यम आकार की एसयूवी की बढ़ती मांग और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच हुंडई मोटर इंडिया ने अपनी बिक्री बढ़ाने की योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2027 से क्रेटा और नई बायॉन की संयुक्त वार्षिक बिक्री कम से कम 2.5 लाख इकाइयों तक पहुंचाना है। इसके जरिए कंपनी मध्यम आकार की एसयूवी श्रेणी में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखना चाहती है। हुंडई का मानना है कि इस श्रेणी में दो अलग-अलग मॉडल होने से वह ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेगी और अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा सकेगी।
हुंडई मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण गर्ग ने नई बायॉन की पेशकश के दौरान यह लक्ष्य साझा किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के लिए 2.5 लाख इकाइयों की बिक्री अंतिम सीमा नहीं, बल्कि आगे की वृद्धि का आधार है। कंपनी भविष्य में इस आंकड़े से भी अधिक बिक्री हासिल करना चाहती है।
मध्यम आकार की एसयूवी श्रेणी में बढ़ती मांग
भारतीय वाहन बाजार में मध्यम आकार की उपयोगिता वाले वाहनों की श्रेणी तेजी से महत्वपूर्ण हुई है। इसमें लगभग 4 से 4.4 मीटर लंबाई वाली एसयूवी और बहुउद्देशीय वाहन शामिल हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इस श्रेणी में करीब 9 लाख वाहन बिके। हुंडई के लिए यह बाजार विशेष महत्व रखता है। कंपनी ने पिछले दो वित्त वर्षों में केवल क्रेटा के दम पर इस श्रेणी में हर साल लगभग 2 लाख वाहनों की बिक्री की। वित्त वर्ष 2025-26 में इस श्रेणी का योगदान कंपनी की कुल घरेलू बिक्री में करीब 35 प्रतिशत रहा।
अब हुंडई इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए क्रेटा के साथ बायॉन को भी उतार रही है। कंपनी को उम्मीद है कि दोनों मॉडल मिलकर अधिक ग्राहकों तक पहुंचेंगे और बिक्री में वृद्धि करेंगे।
क्रेटा के साथ बायॉन क्यों है महत्वपूर्ण?
हुंडई अब तक मध्यम आकार की एसयूवी श्रेणी में मुख्य रूप से क्रेटा पर निर्भर रही है। वहीं, मारुति सुजुकी के पास ग्रैंड विटारा, विक्टोरिस और अर्टिगा जैसे मॉडल हैं, जबकि टाटा मोटर्स कर्व और सिएरा के जरिए ग्राहकों को विकल्प दे रही है।
ऐसे में हुंडई के लिए इस श्रेणी में दूसरा मॉडल पेश करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बायॉन को कंपनी की छोटी एसयूवी वेन्यू और क्रेटा के बीच रखा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। कंपनी का उद्देश्य बायॉन के जरिए ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करना है जो क्रेटा से अलग तरह की सुविधाएं और तकनीक चाहते हैं। हुंडई को उम्मीद है कि इससे नए ग्राहक जुड़ेंगे और कंपनी की बिक्री बढ़ेगी, न कि केवल उसके मौजूदा ग्राहक एक मॉडल से दूसरे मॉडल की ओर जाएंगे।
क्रेटा की बिक्री में आई गिरावट
हुंडई का यह नया कदम ऐसे समय आया है, जब मध्यम आकार की एसयूवी श्रेणी में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में क्रेटा की बिक्री पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9 प्रतिशत से अधिक घटकर 89,727 इकाइयों पर आ गई। दूसरी ओर, इस श्रेणी की कुल बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
तरुण गर्ग ने क्रेटा की बिक्री में गिरावट के पीछे एक कारण डीजल मॉडल की सीमित आपूर्ति को बताया। उनके अनुसार, क्रेटा के डीजल संस्करण के लिए ग्राहकों को एक महीने से अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। ऐसे में बायॉन की पेशकश से कंपनी को अपनी बिक्री बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, नई गाड़ी के बाजार में प्रदर्शन का आकलन उसकी मांग और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
बायॉन में पेट्रोल और सीएनजी का विकल्प
हुंडई बायॉन को पेट्रोल और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) विकल्पों के साथ उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी ने फिलहाल इसका डीजल या विद्युत संस्करण पेश करने की योजना नहीं बनाई है।
तरुण गर्ग के मुताबिक, कंपनी के बाजार अध्ययन से संकेत मिलता है कि इस श्रेणी में पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की मांग अधिक रहेगी। उनका मानना है कि एक ही मॉडल में बहुत अधिक ईंधन विकल्प देने से ग्राहकों के लिए चुनाव जटिल हो सकता है और कंपनी के लिए भी वाहन श्रृंखला का प्रबंधन कठिन हो सकता है। हालांकि, डीजल इंजन हुंडई के दूसरे मॉडलों में उपलब्ध रहेंगे। कंपनी के अनुसार, कुछ वाहनों में ग्राहक डीजल इंजन के शुरुआती खिंचाव और उससे मिलने वाले प्रदर्शन को प्राथमिकता देते हैं।
चेन्नई संयंत्र में होगा निर्माण
हुंडई बायॉन का निर्माण चेन्नई स्थित अपने संयंत्र में करेगी। कंपनी को उम्मीद है कि इस नए मॉडल से संयंत्र की उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। वेन्यू का उत्पादन पुणे स्थानांतरित किए जाने के बाद चेन्नई संयंत्र की उपलब्ध क्षमता का इस्तेमाल करने में भी बायॉन मददगार होगी।
बायॉन के शामिल होने के बाद हुंडई मोटर इंडिया के वाहन पोर्टफोलियो में कुल 10 मॉडल होंगे। इनमें छह एसयूवी, दो सेडान और दो हैचबैक शामिल हैं। कंपनी पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और विद्युत वाहनों के विकल्पों के जरिए अलग-अलग ग्राहक वर्गों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
आगे नए मॉडलों पर भी कंपनी का जोर
हुंडई मोटर इंडिया ने मई 2025 में घोषणा की थी कि वह इस दशक के अंत तक भारतीय बाजार में 26 नए या उन्नत मॉडल पेश करने की योजना बना रही है। इस योजना में आंतरिक दहन इंजन वाले 20 वाहन और छह विद्युत वाहन शामिल हैं। इनमें बिल्कुल नए मॉडल, नई पीढ़ी के वाहन और मौजूदा मॉडलों के उन्नत संस्करण शामिल होंगे।
इसके अलावा, हुंडई मोटर कंपनी ने वर्ष 2032 तक भारत में 15.5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारतीय बाजार में कंपनी की दीर्घकालीन योजनाओं और विस्तार के महत्व का पता चलता है। क्रेटा और बायॉन की संयुक्त बिक्री का लक्ष्य हुंडई की इसी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अब एक लोकप्रिय मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय मध्यम आकार की एसयूवी श्रेणी में अपने विकल्प बढ़ाकर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।