नई दिल्ली :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बुनियाद, वित्तीय मजबूती और निरंतर सुधारों पर आधारित है। भारत किसी दूसरे देश की कीमत पर विकास नहीं करता, बल्कि दुनिया के साथ और दुनिया के लिए समृद्धि के अवसर पैदा करता है। उन्होंने भारत को ऐसी वैश्विक आर्थिक और प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया, जो प्रतिस्पर्द्धा के बजाय सहयोग के माध्यम से साझा विकास को बढ़ावा देना चाहती है।‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं और रणनीतिक संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा के बीच भारत की क्षमताएं वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में भारत भरोसे और स्थिरता का एहसास कराता है।
आर्थिक मजबूती का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% आर्थिक वृद्धि, 700 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार और कराधान, दिवाला तथा श्रम कानूनों में किए गए सुधारों को देश की मजबूती का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे मजबूत बुनियादी ढांचा और लगातार सुधार करने की प्रतिबद्धता है। मोदी के मुताबिक, वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला कानून, श्रम कानूनों का एकीकरण और कारोबार से जुड़े सैकड़ों छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने जैसे कदम कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए सुधार मजबूरी नहीं, बल्कि हमारा संकल्प है।’
डिजिटल तकनीक से बढ़े अवसर
प्रधानमंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को समावेशी विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने किफायती मोबाइल डेटा, डिजिटल भुगतान और सरकारी लाभों के सीधे हस्तांतरण का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक ने आर्थिक अवसरों तक लोगों की पहुंच बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े कारोबारों तक सभी एक ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। भारत अपने डिजिटल अनुभव को साझेदार देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा कर रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित कोविन मंच भी इसी प्रयास का उदाहरण है।
स्टार्टअप और गरीबी उन्मूलन
मोदी ने बताया कि 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप की संख्या कुछ सौ थी, जो अब बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है। इनमें करीब आधे छोटे शहरों और कस्बों में स्थित हैं, जबकि 45% से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सहायता और डिजिटल पहचान एवं भुगतान प्रणालियों ने अहम योगदान दिया है।
वैश्विक निर्भरता और सहयोग की चुनौती
प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि वैश्वीकरण के साथ देशों की रणनीतिक कमजोरियां भी बढ़ी हैं। आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, भुगतान प्रणाली और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।उन्होंने कहा, ‘जो चीजें पहले दुनिया को जोड़ती थीं, उन्हें अब हथियार बनाया जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि दुनिया में इस्तेमाल होने वाली हर पांच जेनेरिक दवाओं में से एक भारत से आती है। देश में 2,000 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र भी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सेवाएं प्रदान करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
मोदी ने कहा कि भारत ने नवंबर 2021 में अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 40% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया था। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 के लगभग 75 गीगावाट से बढ़कर करीब 300 गीगावाट हो गई है। उन्होंने PM सूर्य घर, PM-कुसुम, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही कृत्रिम मेधा, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल तेजी से बढ़ता बाजार बनना नहीं, बल्कि दुनिया को तकनीक, प्रतिभा, विनिर्माण क्षमता और व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराना है। इसके जरिए भारत घरेलू विकास को वैश्विक प्रभाव में बदलने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।