त्रिपुरा में 35 साउंड मीटर सौंपे गए
अगरतला :
दुर्गा पूजा और अन्य आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण तथा निर्धारित मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए त्रिपुरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएसपीसीबी) ने पुलिस विभाग को 35 साउंड लेवल मीटर सौंपे हैं। इन उपकरणों की मदद से पुलिस लाउडस्पीकर, डीजे, वाहनों के हॉर्न और अन्य स्रोतों से उत्पन्न शोर के स्तर की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी कर सकेगी। अगरतला के प्रज्ञा भवन के हॉल नंबर-3 में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण मंत्री अनिमेष देबबर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मांचक इप्पर और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव शांतनु भी कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ध्वनि प्रदूषण की निगरानी मजबूत करने और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से ये उपकरण खरीदे हैं। इन्हें पुलिस विभाग को सौंपने से नियमों का उल्लंघन होने पर मौके पर ध्वनि स्तर की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
पुलिसकर्मियों को दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों को साउंड लेवल मीटर के संचालन, इस्तेमाल और रखरखाव की जानकारी दी गई। उन्हें विभिन्न स्थानों पर ध्वनि का स्तर मापने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कानूनी प्रावधानों और निर्धारित मानकों के बारे में जागरूक किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. बिशु करमाकर ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पुलिस और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. के. शशिकुमार ने ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव, नियंत्रण और नियमन से संबंधित प्रस्तुति दी।
त्योहारों के दौरान विशेष निगरानी
दुर्गा पूजा, दीपावली, जुलूस, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक समारोहों के दौरान तेज आवाज में संगीत तथा लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में नए उपकरणों से पुलिस को शोर के स्तर की जांच करने और निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और शांति क्षेत्रों के लिए अलग-अलग ध्वनि सीमाएं निर्धारित हैं। इनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और सटीक माप जरूरी है। मंत्री अनिमेष देबबर्मा ने पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए उपकरणों का प्रभावी इस्तेमाल करने पर जोर दिया। वहीं, पुलिस महानिरीक्षक मांचक इप्पर ने उपकरणों के उचित उपयोग का भरोसा दिलाया।