मुंबई :
खाद्य पदार्थों की डिलिवरी और त्वरित वाणिज्य क्षेत्र में काम करने वाले ज्यादातर डिलिवरी कर्मियों के पास भोजन के लिए बैठने की जगह और स्वच्छ शौचालय की सुविधा का आभाव है। मांग आधारित काम पर निर्भर ये कर्मी साफ शौचालय और बैठकर खाना खाने के लिए निर्धारित जगह की सुविधा चाहते हैं। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। मांग आधारित काम करने वाले लोगों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के लिए काम करने वाले स्टार्टअप यूपीजेडवाई की रिपोर्ट के अनुसार, 68 प्रतिशत डिलिवरी कर्मी रोजाना 10 घंटे या उससे अधिक काम करते हैं। यह उनके रोजमर्रा के जीवन में लंबे समय तक काम करने की स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक साफ शौचालय सबसे अधिक मांगी जाने वाली सुविधा रही। 91 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसकी जरूरत बताई, जबकि 88 प्रतिशत ने बैठकर खाना खाने के लिए उचित जगह की जरूरत जताई। इसके अलावा, 55 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे मोबाइल मरम्मत सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 29 प्रतिशत ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी बदलने की सुविधा को उपयोगी बताया। यूपीजेडवाई गिग वर्कर सर्वे-2026 के तहत खाद्य पदार्थों की डिलिवरी और वाणिज्य क्षेत्र में काम करने वाले 4,163 डिलिवरी कर्मियों से आमने-सामने बातचीत के आधार पर सर्वेक्षण किया गया। यूपीजेडवाई के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आदित्य वुची ने कहा कि अस्थायी कर्मचारी अब खाद्य पदार्थों और वाणिज्य से लेकर परिवहन तथा मांग पर उपलब्ध अन्य सेवाओं तक भारत की शहरी अर्थव्यवस्था के कामकाज का अभिन्न हिस्सा हैं। जैसे-जैसे यह कार्यबल बढ़ रहा है, इन पर निर्भर कारोबार क्षेत्रों के लिए कर्मचारियों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए उद्योग को केवल कमाई और ऑर्डर पूरा करने के नजरिये से आगे बढ़कर व्यापक गिग अर्थव्यवस्था के हिस्से के रूप में कामगारों के अनुभव पर भी ध्यान देना चाहिए। उचित सहायता व्यवस्था तैयार करने से कंपनियों को समय के साथ अधिक टिकाऊ कार्यबल तैयार करने में मदद मिल सकती है।