अगरतला : त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के उज्जयंत महल के पास आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव कई मायनों में अनोखा होता है। यहां पर देवी दुर्गा की दो भुजाओं वाली मूर्ति की पूजा की जाती है। साथ ही प्रसाद के रूप में देवी को मांस-मछली के साथ फल भी चढ़ाए जाते हैं। मुख्य पुजारी जयंत भट्टाचार्य ने बताया कि यहां की दुर्गा की 2 भुजाओं वाली मूर्ति 12 फुट ऊंची है। भट्टाचार्य ने कहा कि पहले माणिक्य राजवंश 10 भुजाओं वाली दुर्गा की मूर्ति की पूजा करता था, लेकिन लगभग 550 साल पहले त्रिपुरा के गोमती जिले के अमरपुर में रानी सुलक्षणा देवी के 10 भुजाओं वाली देवी को देखकर बेहोश हो जाने के बाद बीरचंद्र माणिक्य ने 2 भुजाओं वाली दुर्गा की पूजा शुरू की थी।
देवी का प्रसाद अनोखा : उन्होंने कहा कि देवी को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद अनोखा है, क्योंकि दुर्गा पूजा के दिनों में मांस और मछली के साथ फल भी चढ़ाए जाते हैं, जो पिछले 148 वर्षों से दुर्गाबाड़ी पूजा की परंपरा रही है। मुख्य पुजारी ने बताया कि दुर्गाबाड़ी दुर्गा पूजा की एक और खास बात यह है कि विलय समझौते के तहत सम्मान स्वरूप त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवान देवी को तोपों की सलामी देते हैं।
दुर्गा पूजा का यह 149वां आयोजन : भट्टाचार्य ने बताया कि कृष्ण किशोर माणिक्य ने लगभग 600 साल पहले वर्तमान बांग्लादेश के चकलारुशनाबाद में दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि 1949 में भारत संघ के साथ विलय समझौते पर हस्ताक्षर होने तक माणिक्य राजवंश बांग्लादेश से लेकर त्रिपुरा तक विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पूजा का आयोजन करता रहा है। समझौते के अनुसार, राज्य सरकार ने मंदिर का संचालन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि शाही महल से सटे दुर्गाबाड़ी मंदिर में दुर्गा पूजा का यह 149वां आयोजन वर्ष होगा। मुख्य पुजारी ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और आम लोग दुर्गाबाड़ी मंदिर आते हैं। इस वर्ष दुर्गा पूजा 28 सितंबर से दो अक्टूबर तक मनाई जाएगी।